एम सी मेरीकॉम के खाते में लगभग सभी पदक हैं लेकिन उनका कहना है कि वह अब भी एक जुनूनी खिलाड़ी की तरह प्रशिक्षण करती है जिसका सबसे ताजा नतीजा यहां राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर दिखाया. तीन बच्चों की मां 35 साल की मेरीकॉम पांच बार की विश्व विजेता और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता हैं. उन्हें ना केवल भारत में बल्कि दूसरे देशों में भी मुक्केबाजी की महानायिका के रूप में देखा जाता है. कुछ महीने पहले ही एशियाई चैंपियनशिप जीतने वाली खिलाड़ी ने आज यहां राष्ट्रमंडल खेलों में लाइट फ्लाईवेट (48 किग्रा ) मुक्केबाजी का स्वर्ण जीतकर एक और उपलब्धि हासिल कर ली.

उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में अपने अभियान के अंत के बाद कहा , ‘‘ मेरी सफलता का राज मेरी फिटनेस है और मैं बहुत फुर्तीली हूं. मैं मुकाबले से पहले अच्छे से योजना बनाती हूं. मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं कुछ ही सेकेंड में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव बना सकती हूं. मैं बहुत ही तेजी से उनका खेल समझ जाती हूं. ’’

मणिपुर की खिलाड़ी ने कहा , ‘‘ मुझे चोट नहीं लगी है , बस कई बार मेरी मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. ’’ और उनके फिटनेस के स्तर एवं रिंग में शांति चित्त स्वभाव का राज उनका कड़ा प्रशिक्षण है जो वह एक भी दिन नहीं छोड़ती.

मेरीकॉम ने कहा , ‘‘ जब मैं मन में कुछ तय कर लेती हूं तो मेरे पति भी मुझे नहीं रोक सकते. वह कई बार मुझसे कहते हैं कि प्रतियोगिताओं के बाद थोड़ी सुस्ती कर लूं लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती. ’’

उन्होंने कहा , ‘‘ मुझे खुद को शांतचित्त बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण लेना पड़ता है. यह एक आदत है और प्रशिक्षण से मुझे खुशी मिलती है. जब मैं प्रशिक्षण नहीं लेती तो कई बार बीमार सा महसूस करती हूं. ’’

(इनपुट- भाषा)