नई दिल्ली. कॉमनवेल्थ गेम्स के पहले ही दिन मीराबाई चानू ने भारत के लिए महिलाओं की 48 केजी कैटेगरी का गोल्ड मेडल जीता. गोल्ड कोस्ट में ये कमाल चानू ने 196 किलोग्राम का भार उठाकर किया, जो कि कॉमनवेल्थ खेलों के इतिहास का रिकॉर्ड है. चानू ने स्नैच में रिकॉ्रड 86 केजी वजन उठाया जबकि क्लीन एंड जर्क में 110 किलो का भार उठाया. गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में इस कामयाबी को हासिल करने वाली मीराबाई चानू के लिए यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. चानू बताती हैं जब उन्होंने वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग शुरू की थी, तब उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी. इस वजह से उन्हें कई बार अच्छी डाइट नहीं मिल पाती थी. उनके कोच ने उन्हें डाइट चार्ट देते हुए चिकन और दूध ज्यादा से ज्यादा लेने के लिए कहा था। लेकिन उस वक्त उनके परिवार के लिए उन्हें ये दे पाना संभव नहीं था. लेकिन इसके बाद भी उन्होंने प्रैक्टिस को जारी रखा.

 

मणिपुर की ‘पावरवुमन’ का संघर्ष 

VIDEO : कॉमनवेल्थ चैम्पियन बनने के बाद मीराबाई चानू का पहला इंटरव्यू

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सिखोम मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के एक छोटे से गांव में हुआ था. उनका गांव राजधानी इम्फाल से करीब 200 किलोमीटर दूर था. मीराबाई चानू ने मणिपुर की महिला वेटलिफ्टर कुंजुरानी देवी को देखकर इस खेल में करियर बनाने का सोचा. चानू ने साल 2007 में जब प्रैक्टिस शुरू की तो उनके पास वजन उठाने के लिए लोहे की रॉड नहीं थी, जिसके बाद उन्होंने बांस से ही प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया. ट्रेनिंग के लिए वे रोजाना 50-60 किलोमीटर दूर जाया करती थीं. इसके बाद 11 साल की उम्र में वे अंडर-15 और 17 साल में जूनियर चैम्पियन बनीं. चानू ने 31 अगस्त, 2015 में रेलवे ज्वाइन की. वे वहां सीनियर टिकट कलेक्टर के पद पर हैं. बेहतरीन खेल के लिए उन्हें कुछ दिन पहले पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

 

रियो में सपना टूटा, गोल्ड कोस्ट में भरी उड़ान

CWG में भारत को पहला गोल्ड, वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू रिकॉर्ड जीत के साथ बनीं 'गोल्डन क्वीन'

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चानू ने आज बेशक देश के लिए गोल्ड मेडल जीता हो लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब वो इस खेल को छोड़ना चाहती थीं. रियो ओलिंपिक 2016 में खराब परफॉर्मेंस के बाद चानू डिप्रेशन में चली गईं थी और इससे उबरने के लिए उन्हें मनोवैज्ञानिक मदद लेना पड़ी थी. रियो ओलिंपिक में वे अपना गेम ही पूरा नहीं कर सकी थीं. अपनी कैटेगरी में वे केवल दूसरी ऐसी वेटलिफ्टर थीं जिनका नाम ‘डिड नॉट फिनिश’ कैटेगरी में लिखा गया था. इस असफलता के बाद मीराबाई चानू के मन में खेल को छोड़ने का विचार तक आ गया था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अगले ही साल वर्ल्ड चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतकर शानदार वापसी की थी.
साल 2017 में हुई वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में चानू ने 48 किलोग्राम वर्ग में अपने से करीब चार गुना ज्यादा वजन यानी 194 किलोग्राम उठाकर गोल्ड जीता था. और अब उन्होंने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ में 196 किलो का भार उठाकर सोने का तमगा जीता है.