नई दिल्ली. गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ के लिए भारतीय दल का पंच लाइन है – रंग दे तिरंगा. मीराबाई चानू के लाजवाब परफॉर्मेन्स को देखने के बाद कहा जा सकता है कि ये पंच लाइन बिल्कुल परफेक्ट है. महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग की वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में मीराबाई चानू ने सिर्फ तिरंगे का मान ही नहीं रखा, खुद की रिकॉर्ड जीत के साथ उसका परचम भी बुलंद किया. मीराबाई ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क मिलाकर कुल 196 किलो का भार उठाया जो कि एक कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड है. इस रिकॉर्ड तोड़ जीत से मीराबाई कॉमनवेल्थ की चैम्पियन बनीं और उसके बाद अपनी फीलिंग्स को दुनिया के सामने एक छोटे से इंटरव्यू के जरिए रखा. मीराबाई ने बताया कि कॉमनवेल्थ की क्वीन बनने के बाद अब उनका सपना एशिया की रानी बनने का है.

सवाल – आपने कॉमनवेल्थ का रिकॉर्ड तोड़ा है, इस पर आपका क्या कहना है ?

मीराबाई- इस कामयाबी को हासिल करने के लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी. लेकिन अब जब मैंने रिकॉर्ड तोड़ दिया है तो मैं बेहद खुश हूं.

सवाल- क्या आप ये सोचकर यहां आई थी कि इस बार रिकॉर्ड तोड़ना ?

मीराबाई- हां, मैं ये सोचकर आई थी और मैंने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे मैं बहुत खुश हूं . रिकॉर्ड को तोड़ते हुए मैंने गोल्ड मेडल जीता, ये बड़ी बात है. इसमें मेरे कोच ने भी मेरी काफी मदद की है.

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सवाल- कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए आपको कितनी तैयारी करनी पड़ी और इसके लिए आपने कहां तैयारी की ?

मीराबाई- कॉमनवेल्थ का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए मैंने कड़ी मेहनत के साथ खूब तैयारी की थी. मैंने इसके लिए मेलबर्न जाकर ट्रेनिंग ली थी. उसी का नतीजा है कि मैं यहां कामयाब रही.

सवाल-अब आपका अगला लक्ष्य क्या है ?

जवाब- मेरा अगला लक्ष्य अब एशियन गेम्स है. मैं चाहूंगी कि मैं वहां इससे भी बढ़िया प्रदर्शन करूं और वहां भी इसी तरह चैम्पियन बनूं.

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इसमें दो राय नहीं कि मीराबाई चानू के कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतने के बाद अब उनसे उम्मीदें भी बढ़ गई है. कॉमनवेल्थ गेम्स में तो उन्होंने दमदार परफॉर्मेन्स देते हुए सोना जीत लिया अब इसी कामयाबी को एशियन गेम्स में भी दोहराने की उनके सामने बड़ी चुनौती होगी.