नई दिल्ली: विराट कोहली के मैदान पर आक्रामक हावभाव भले ही क्रिकेट को पारंपरिक नजरिये से देखने वालों को पसंद नहीं हों लेकिन भारतीय कप्तान जनता की धारणा को अधिक तवज्जो नहीं देते क्योंकि वह कड़े मैच हालात में ‘रोबोट’ की तरह काम नहीं करना चाहते. बोरिया मजूमदार की नई किताब ‘ इलेवन गाड्स एंड ए बिलियन इंडियन्स ’ के विमोचन के मौके पर कोहली ने कहा, ‘ लोग क्या लिखेंगे या आपके बारे में क्या बोलेंगे इसे देखते हुए आप रोबोट की तरह काम नहीं कर सकते.’’

दक्षिण अफ्रीका में भारत टेस्ट सीरीज में वाइटवॉश के कगार पर खड़ा था लेकिन इसके बाद अंतिम टेस्ट में टीम ने वापसी करते हुए जीत दर्ज की और फिर सीमित ओवरों के प्रारूप की दोनों सीरीज भी जीती. घसियाली पिच पर पहले बल्लेबाजी के फैसले की सबने आलोचना की थी लेकिन पिच के धीरे धीरे टूटने के कारण यह बाद में मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ. कोहली ने कहा, ‘‘आत्मविश्वास सबसे महत्वपूर्ण है. आपके अंदर ऐसी क्षमता होने की जरूरत है कि आप चीजों को बाकी लोगों की तुलना में बिलकुल अलग नजरिये से देख सकें. चौतरफा आलोचना के बावजूद हमने चीजों को अलग नजरिये से देखा जैसे टास जीतना और बल्लेबाजी.’’

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उन्होंने कहा, ‘‘टीम का मानना था कि यह हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ फैसला है और हमने इसका समर्थन किया. हमेशा आपका एक रास्ता होता है और अगर आप अपने रास्ते पर विश्वास रखो तो आप चीजों को अपने पक्ष में कर सकते हो.’’ भारत के 241 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका की टीम एक समय एक विकेट पर 124 रन बनाकर मजबूत स्थिति में थी लेकिन इसके बाद 177 रन पर ढेर हो गई और भारत ने 63 रन से जीत दर्ज की जो दक्षिण अफ्रीका की सरजमीं पर उसकी सिर्फ तीसरी टेस्ट जीत थी.

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कोहली ने एक बार फिर अपने करियर में सचिन तेंदुलकर की भूमिका पर बात की और उन्हें याद है जब वानखड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ उनके अंतिम टेस्ट में उन्होंने इस दिग्गज बल्लेबाज के पैर छुए थे. उन्होंने कहा, ‘‘काफी लोग ऐसे नहीं हैं जो मेरे करीब हैं. इतने साल पर मेरा जीवन ऐसे ही चला है क्योंकि स्वाभाविक है कि जब मुश्किल समय के दौरान कोई मेरा साथ देता है तो मैं उसका काफी सम्मान करता हूं. मैं ऐसा करना जारी रखूंगा.’’ कोहली ने कहा, ”बड़े होते हुए क्रिकेटर के रूप में उनका मेरे ऊपर काफी प्रभाव रहा. मैं इसकी अहमियत समझता हूं. इसके बारे में बताना काफी मुश्किल है.’’