हरारे: जिम्बाब्वे क्रिकेट (जेडसी) ने आईसीसी विश्व कप क्वालीफायर में बुरे प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को टीम के कप्तान ग्रेम क्रेमर और पूरे कोचिंग स्टाफ को बर्खास्त कर दिया. वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, जेडसी ने इन सभी को दिन के तीन बजे तक अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने को कहा था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और संघ ने सभी को बर्खास्त कर दिया.

इसी के साथ मुख्य कोच हीथ स्ट्रीक, बल्लेबाजी कोच लांस क्लूजनर, गेंदबाजी कोच डग्लस होंडो और फील्डिंग कोच वाल्टर चावागुटा, फिटनेस कोच सीन बेल और टीम एनालिस्ट स्टानले चिओजा का सफर जिम्बाब्वे टीम के साथ समाप्त हो गया. अंडर-19 टीम के कोच स्टीफन मागोगो और व्यान जेम्स के साथ मुख्य चयनकर्ता टटेंडा टायबू को भी हटा दिया गया है.

जेडसी के एमडी फैजल हसनेन ने स्ट्रीक को भेजे ई-मेल मे लिखा, “हमारे बीच हुई बातचीत के बाद आप अपने तकनीकी स्टाफ, जिसमें आप भी शामिल हैं, अपरान्ह तीन बजे तक आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देने को कहिए. इसके बाद तकनीकी टीम उन्हें बर्खास्त मान लेगी और उन्हें उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटा देगी.”

स्ट्रीक और उनके स्टाफ ने यह कहते हुए इस्तीफा देने से मना कर दिया था कि उनका मानना है कि टीम की विफलता का मतलब पूरी तरह से उनके काम की विफलता नहीं है. स्ट्रीक ने इस पर निराशा जताई है. उन्होंने कहा, “एक पूर्व खिलाड़ी और कोच के तौर पर मैंने जो जिम्बाब्वे क्रिकेट को दिया, उसके बदले एक ई-मेल भेजकर, वो भी बिना किसी पूरी जानकारी के, हटा देना..यह मैंने उम्मीद नहीं की थी.”

उन्होंने कहा, “मैं जानता हूं कि हर कोच का कार्यकाल खत्म होता है, लेकिन हमें कम से कम हमारी बात रखने का मौका तो मिलना चाहिए था. मैं टीम को 2020 में होने वाली टी-20 विश्व कप में ले जाने के बारे में सोच रहा था.” स्ट्रीक आईपीएल 2018 में कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के बॉलिंग कोच भी हैं.

कप्तान, कोच और कोचिंग स्टाफ की बर्खास्तगी का बड़ा कारण 2019 वर्ल्ड कप के लिए जिम्बाब्वे का क्वालिफाई नहीं कर पाना है. वर्ल्ड कप क्वालीफायर के अंतिम सुपर सिक्स मुकाबले में संयुक्त अरब अमीरात से 3 रन की हार मिली थी. लेकिन बर्खास्तगी का एक कारण जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड की खराब आर्थिक हालत भी है. वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाने के बाद इसमें जल्द सुधार की कोई उम्मीद भी नहीं है. टीम के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को शुरुआत में फरवरी महीने के लिए 40 फीसदी वेतन ही दिया गया था. बोर्ड ने अब मार्च महीने में वेतन भी नहीं देने का फैसला किया है.