नई दिल्ली| योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते ही बूचड़खानों पर गाज गिरने लगी है। एक टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने मंगलवार को गाजियाबाद में 15 बूचड़खाने बंद कराए। बताया जा रहा है कि गाजियाबाद के केला भट्टा इलाके में इन बूचड़खानों को अवैध रूप से चलाया जा रहा था। बूचड़खाना बंद कराने के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

मंगलवार को ही लखीमपुर खीरी में भी एक बूचड़खाने को सील किया गया। इस बूचड़खाने को भी बिना लाइसेंस के चलाया जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी बूचड़खाने पर कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि वाराणसी के जैतपुरा इलाके में एक बूचड़खाना बंद करया गया। सोमवार को इलाहाबाद में नगर निगम ने दो बूचड़खानों को सील कराया था।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कागजातों में कुल 126 बूचड़खानों का ब्यौरा है। मगर सूत्र बताते हैं कि इससे कई गुना ज्यादा बगैर परमिट के चलाए जा रहे हैं। जो 126 बूचड़खाने चल भी रहे हैं तो उसमें से अधिकांश मानकों का पालन नहीं कर रहे। उनके पास ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं है।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद बूचड़खाना संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी उत्तर प्रदेश के लिए अपने घोषणापत्र में सरकार बनने पर सूबे के सभी बूचड़खानों को बंद करने की बात कही थी।

चुनाव प्रचार का बिगुल बजते ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश में 12 मार्च से ही सभी बूचड़खानों को बंद करने का ऐलान कर दिया। बूचड़खाने बंद करने के अपने अग्रिम फैसले की बीजेपी ने मुखर होकर पैरवी की।