लखनऊ: तेंदुआ सामने आ जाए तो किसी का भी बुरा हाल हो सकता है, लेकिन एक 55 साल के बुजुर्ग ने अपनी जान की परवाह किए बिना तेंदुए के चंगुल से अपने पांच साल के पोते को बचा लिया. बुजुर्ग ने अपने पोते के लिए काफी देर तक तेंदुए से लड़ाई की. तेंदुए से लड़ाई में वह बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए. मासूम को भी सिर में चोटें आई लेकिन उसकी जान बच गई. बहादुरी के लिए बुजुर्ग को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा सकता है. वन विभाग द्वारा उनका नाम इस पुरस्कार के लिए भेजा जा रहा है.

लाठी लेकर तेंदुए से भिड़ गए कुंजीलाल
बता दें कि उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत कतर्नियाघाट रेंज के चहलवा गांव के मजरा सिरसियनपुरवा के रहने वाले 55 साल के कुंजीलाल छुट्टा जानवरों से फसल को बचाने के लिए खेत में सोने गए थे. साथ में उनका पांच साल का पोता कमल नयन भी चला गया. शनिवार रात लगभग 12 बजे के आसपास खेत में तेंदुआ आ गया. तेंदुए में सोते हुए बच्चे को दबोच लिया. कमल के चीखने की आवाज़ सुन उसके दादा कुंजीलाल की जाग गए. हाल देख एकबारगी उनके भी होश उड़ गए. इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत बांधी और चंगुल में फंसे बच्चे को बचाने के लिए तेंदुए के सामने कूद पड़े. उन्होंने काफी देर तक लाठी लेकर तेंदुए से लड़ाई की. वह करीब 25 मिनट तक लड़ते रहे. आखिरकार तेंदुआ बच्चे को छोड़ जंगल की ओर भाग गया.

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वन विभाग द्वारा अवार्ड के लिए भेजा जाएगा नाम
गांव के लोगों ने भी तेंदुए को खदेड़ा. मौके पर पहुंची वैन विभाग की टीम ने बुरी तरह से जख्मी हुए कुंजीलाल और बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया. दोनों की हालत ठीक बताई जा रही है. इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल ज़रूर है, लेकिन कुंजीलाल की बहादुरी की चर्चा हो रही है. वन विभाग ने कुंजीलाल की बहादुरी की सराहना की है. एएनआई के अनुसार इलाके के वन अधिकारी ने कहा कि कुंजीलाल का नाम रानी लक्ष्मीबाई वीरता अवार्ड के लिए यूपी सरकार को भेजा जाएगा.