लखनऊ: सपा नेता आज़म खान ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जब वह ममता बनर्जी से मिले थे तब ये तय हो गया था कि महा गठबंधन होगा. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी से बातचीत के दौरान ये बात हुई थी कि बीजेपी के खिलाफ चुनाव मिलकर ही लड़ा जाना चाहिए. हालांकि आज़म खान ने ये साफ़ नहीं किया कि आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर गठबंधन कैसे और किस तरह से होगा. इसमें कौन-कौन शामिल होगा.

ये भी पढ़ें: कर्नाटक चुनावः जानिए कांग्रेस से क्यों गठबंधन करना चाहते हैं जनता दल-एस के नेता एच.डी. देवेगौड़ा

अखिलेश-मायावती दे चुके हैं गठबंधन के संकेत

बता दें कि अगले लोकसभा चुनाव को लेकर गठबंधन के कयास लगाये जा रहे हैं. राजनैतिक गलियारों में गठबंधन को लेकर काफी समय से चर्चा हैं. यूपी में सपा-बसपा और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं. अन्य दल भी उनके साथ आ सकते हैं. सपा मुखिया अखिलेश यादव इसके संकेत दे चुके हैं. वहीं, हाल ही में फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर हुए उप चुनाव में बसपा ने सपा को समर्थन दिया था. इसका असर ये हुआ कि बीजेपी फूलपुर सीट के साथ ही अपनी गोरखपुर की पारंपरिक सीट भी सपा से हार गई थी. इस जीत के बाद अखिलेश यादव के साथ ही बसपा प्रमुख मायावती ने सपा के साथ दोस्ती की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव से उनके कोई मतभेद नहीं हैं. उन्होंने गेस्ट हाउस कांड का भी ज़िक्र कर कहा था कि अखिलेश यादव तब राजनीति में नहीं थे. मायावती के इस बयान के पहले अखिलेश यादव ने कहा था कि पुरानी बातों को भूल जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें: गठबंधन के जरिए 2019 के लिए जमीन तैयार कर रही है कांग्रेस

 

2004 में सोनिया गाँधी ने अपनाया था ये फ़ॉर्मूला

गौरतलब है कि सोनिया गांधी ने भी 2004 में यही फार्मूला अपनाया था. और कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर अटल सरकार को सत्ता से हटाने में सफल रही थीं. गठबंधन की राजनीति से दूरी बनाकर रहने वाले राहुल की बदली राजनीतिक सोच के पीछे प्रियंका गांधी को बताया जा रहा है. प्रियंका उत्तर प्रदेश विधानसभा में गठबंधन को अंतिम मुकाम पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं. उत्तर प्रदेश में यदि आगामी विधानसभा चुनाव में अखिलेश जीतते हैं तो गैर बीजेपी दलों का तेजी से ध्रुवीकरण होगा. वहीं कांग्रेस की कोशिश छोटे-बड़े क्षेत्रीय दलों को एक साथ लाकर बड़ा गठबंधन तैयार कर 2019 में मोदी को कड़ी चुनौती देने की होगी.