लखनऊ: बसपा प्रमुख मायावती ने अपने शासनकाल में जारी शासनादेश पर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उन्होंने तब ये आदेश झूठे मामलों से बचने के लिए अविलंब जांच कर कार्रवाई को लेकर दिए थे. इसे बाद में वापस भी ले लिया गया था. बीजेपी एससी-एसटी एक्ट मामले में अपनी खामियों को छिपाने के लिए बसपा के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है. उन्होंने भारत बंद के दौरान हिंसा का ठीकरा बीजेपी सरकार पर फोड़ा है. मायावती ने कहा कि पूरे देश में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध हुआ लेकिन जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार है, सिर्फ उन्हीं राज्यों में हिंसा हुई. प्रदर्शन को हिंसक बनाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी किया गया.

अपने शासन काल के शासनादेश पर दी सफाई
बता दें कि मायावती पर बसपा शासन काल में एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने के आरोप लगे हैं. उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि बीजेपी जिन शासनादेशों का हवाला देकर बसपा को बदनाम करने की कोशिश कर रही है, उसकी तुलना सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से करना गलत है. उन्होंने अपने शासनकाल में जारी शासनादेश पर सफाई दी और कहा कि आदेश में झूठे मामलों से बचने के लिए अविलंब जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे. इसे बाद में वापस भी ले लिया गया था. और एससी-एसटी एक्ट को उसकी मूल भावना के अनुरूप लागू करने का आदेश भी जारी हुआ था.

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मीडिया पर भी साधा निशाना
मायावती ने मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मीडिया का कुछ हिस्सा सच को तोड़मरोड़ कर पेश कर रहा है. बसपा को बुरा दिखाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में नुकसान में है. यह वो फूलपुर और गोरखपुर में हुए उपचुनाव में हार से देख चुकी है. धीरे-धीरे पूरे देश में एंटी बीजेपी माहौल तैयार हो रहा है.

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सीएम पद की शपथ लेने के तुरंत बाद दिया था आदेश
मायावती ने वर्ष 2007 में 19 मई को यूपी के सीएम पद की शपथ ली थी. इसके कुछ ही महीने बाद उन्होंने सरकार के आला अफसरों के साथ एक बैठक की. इसमें उन्होंने मुख्य सचिव को SC/ST एक्ट के क्रियान्वयन में विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया था. मायावती ने बतौर मुख्यमंत्री कहा था कि कभी-कभी दबंग लोग आपसी दुश्मनी के कारण इस एक्ट का सहारा लेकर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को मोहरा बनाकर उन पर केस दर्ज करा देते हैं. ऐसे मामलों में सत्यता की जांच करने के बाद ही केस दर्ज किया जाए. प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि इस एक्ट का कतई दुरुपयोग न हो. इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने सरकार की ओर से SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को रोकने वाला शासनादेश जारी किया था.