लखनऊ: प्रदेश के डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं से सम्बंधित व्यक्ति या संस्थान अब 6 माह तक अगर हड़ताल तो खैर नहीं, प्रदेश सरकार ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों पर एस्मा लागू कर दिया है.

अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा )

एस्मा अर्थात अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम लागू करने के पीछे चिकित्सा संस्थानों में सेवाओं से असंतुष्ट होने की दशा में तीमारदारों और चिकित्सकों तथा कर्मचारियों के बीच तनातनी और मारपीट की घटनाओं को रोकना है. इसका अनावश्यक खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ता है, क्योंकि ऐसी घटनाओं की परिणति हड़ताल के रूप में ही होती है और कानून- व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है.
छह माह तक हड़ताल पर रोक
ऐसे में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों और प्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेजों में अगले 6 माह तक हड़ताल पर रोक लगा दी गई है. इसमें लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस भी शामिल है.
कानून का उल्लंघन करने वाले जेल
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉक्टर के के गुप्ता ने बताया कि इन संस्थानों में कानून और व्यवस्था बनाए रखने और चिकित्सकों और तीमारदारों के बीच के माहौल को सौहार्दपूर्ण बनाए रखने को लेकर इंतजाम किए जा रहे हैं, इसीलिए प्रदेश सरकार द्वारा एस्मा लागू किया गया है .इसमें कानून का उल्लंघन करने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजने का प्रावधान है.

उत्तर प्रदेश के निम्न संस्थानों में लागू होगा एस्मा
एसजीपीजीआई, केजीएमयू, डॉ राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस,
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई, सुपर स्पेशलिटी बाल चिकित्सालय एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान नोएडा, गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस ग्रेटर नोएडा और कानपुर के हृदय रोग व कैंसर संस्थान में एस्मा लागू.
इसके अलावा 13 राजकीय मेडिकल कॉलेजों इलाहाबाद ,आगरा ,कानपुर ,सहारनपुर, मेरठ, आजमगढ़ ,अंबेडकर नगर, झांसी, गोरखपुर, कन्नौज, जालौन, बांदा व बदायूं में भी एस्मां लगाया गया है.