नई दिल्ली. धर्म और आस्था की समृद्ध परंपरा भारत को दुनियाभर में विशेष बनाती है. इसलिए दुनियावी माया-मोह में जकड़े और आर्थिक समस्याओं से निजात पाने के लिए शांति की खोज में विदेशी सैलानी हर साल हजारों की संख्या में भारत आते हैं. इनमें से कई लोग तो महीने-दो महीने भारत के धर्मस्थलों के सैर-सपाटे के बाद स्वदेश लौट जाते हैं, लेकिन कई लोग जीवन के बाकी दिन यहीं गुजारने की कामना में बसने की कोशिश करने लगते हैं. ऐसी ही सैलानियों में से एक हैं जर्मनी की फ्रेडरिक एरिना ब्रूनिंग. वर्षों पहले भारत के धर्म और आध्यात्म को जानने-समझने के लिए फ्रेडरिक इस देश में घूमने आई थीं. वह भारत के कई धर्मस्थलों पर गईं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा पहुंचने के बाद उनका जीवन ही बदल गया. वह यहीं की होकर रह गईं. मथुरा की गलियों और सड़कों पर घूमती घायल गायों को देखकर फ्रेडरिक ने यहीं रहकर गायों की सेवा का व्रत ले लिया. अब फ्रेडरिक यहां सुदेवी के नाम से जानी जाती हैं.

1600 गायों की सेवा में बिता रहीं जीवन
हमारे सहयोगी चैनल WION पर जारी वीडियो के अनुसार मथुरा में आने के बाद सुदेवी को यहां पर जहां-तहां घूमती गायों का दुख देखा नहीं गया. उन्होंने गो सेवा का प्रण लिया और आज यहां की 1600 गायों के लिए सुदेवी वरदान सरीखी हैं. आज वह मथुरा में एक गोशाला चलाती हैं जहां बीमार और घायल हो जाने वाली गायों की देखरेख की जाती है. यह काम करने के लिए वह सरकार से किसी तरह की मदद नहीं लेतीं, बल्कि जर्मनी के बर्लिन स्थित अपने स्रोत से ही गायों की मदद के लिए आर्थिक सहयोग जुटाती हैं.

वीजा अवधि समाप्त हो रहा, मिलीं सांसद हेमामालिनी से
मथुरा में रह रहीं जर्मन नागरिक फ्रेडरिक उर्फ सुदेवी की भारत में रहने की वीजा अवधि समाप्त होने वाली है. वह इसके लिए चिंतित हैं, लेकिन इससे ज्यादा चिंता उन्हें अपनी गायों की सता रही है. इसलिए वीजा अवधि बढ़ाने के लिए वह हाल ही में मथुरा से भारतीय जनता पार्टी की सांसद हेमामालिनी से मिलीं. सांसद हेमामालिनी ने सुदेवी की गायों के प्रति चिंता को देखते हुए उनकी वीजा अवधि बढ़वाने का आश्वासन दिया है.