लखनऊः पिछले सप्ताह गुजरात में एक दलित युवक की घोड़ी की सवारी के कारण कथित तौर पर की गई हत्या के बाद उत्तर प्रदेश में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है. राज्य के कासगंज जिले की पुलिस ने एक दलित युवक को घोड़ी पर चढ़कर बारात निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. उसका कहना है कि इससे इलाके में माहौल खराब हो जाएगा. इसके बाद युवक ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अनुमति के लिए याचिका दाखिल की. हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज करते हुए कह दिया कि यह कानून और व्यवस्था का मामला है.

दरअसल, कासगंज के युवक संजय कुमार ने हाईकोर्ट में घोड़ी पर चढ़कर बारात निकालने की गुहार संबंधी याचिका दाखिल की थी. युवक ने हाईकोर्ट से कहा था कि गांव की सवर्ण बिरादरी के लोग उसे घोड़ी पर नहीं चढ़ने दे रहे हैं. दूल्हे की अर्जी निस्तारित करते हुए हाईकोर्ट ने पिछले दिनों कहा कि यह कानून-व्यवस्था का मामला है. लिहाजा, दूल्हा स्थानीय पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराए या न्यायालय में केस करे. हाईकोर्ट ने दूल्हे की याचिका में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. संजय की शादी 20 अप्रैल को निजामपुर गांव की शीतल के साथ होनी है.

घोड़ी पर चढ़कर बारात ले जाना चाहता है युवक
हाईकोर्ट के जज रणविजय सिंह और शशिकांत की पीठ ने युवक की याचिका पर सुनवाई की. याची का कहना है कि कासगंज के निजामपुर गांव में उसकी शादी शीतल से तय हुई है. वह अपनी बारात में घोड़ी पर चढ़कर जाना चाहता है, मगर निजामपुर में आज तक कोई भी दलित युवक घोड़ी पर चढ़कर बारात नहीं गया, क्योंकि गांव के सवर्ण बिरादरी के लोग उनको ऐसा नहीं करने देते हैं.

हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी. जिलाधिकारी और एसपी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की. रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में अलग से कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है. यदि कोई दूल्हा या लड़की पक्ष को परेशान कर रहा है या जोर जबरदस्ती कर रहा है तो वह पुलिस से शिकायत कर सकता है. हाईकोर्ट ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था का मामला है.

पुलिस ने कहा माहौल बिगड़ेगा
स्थानीय सवर्ण लोगों के विरोध का भय होने के कारण संजय हाईकोर्ट की शरण में चला गया. पुलिस और प्रशासन ने भी बरात निकालने की अनुमति देने से पहले ही मना कर दिया था. कासगंज जिला प्रशासन ने दूल्हे की घुड़चढ़ी की मांग के संबंध में कोर्ट को जानकारी उपलब्ध करवाई थी कि दलित युवक को घोड़ी पर बैठ कर बारात ले जाने की अनुमति देने से स्थानीय माहौल बिगड़ सकता है. स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट पर कोर्ट ने याची को राहत नहीं दी है.