नई दिल्ली. SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 को लेकर सोमवार को देशभर में भारत बंद के दौरान बवाल हुआ. देश के 10 राज्यों में बंद के दौरान प्रदर्शन से हिंसा फैली और 10 लोगों की मौत हुई. यह बंद सुप्रीम कोर्ट के अधिनियम के कुछ नियमों को शिथिल करने के फैसले के खिलाफ था. बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने इस भारत बंद का समर्थन किया था और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह SC/ST एक्ट को लेकर गंभीर नहीं है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाया था. लेकिन हमारे सहयोगी चैनल जी न्यूज के पास यूपी सरकार का ऐसा आदेश है, जिसमें इस एक्ट के नियमों का दुरुपयोग न हो, इसके लिए ढिलाई देने का आदेश दिया गया था. गौरतलब यह है कि यह आदेश वर्ष 2007 का है, जिस समय यूपी की सीएम मायावती ही थीं. उन्होंने ही मुख्यमंत्री रहते हुए इस एक्ट के नियमों में ढिलाई का आदेश दिया था.

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सीएम पद की शपथ लेने के तुरंत बाद दिया था आदेश
मायावती ने वर्ष 2007 में 19 मई को यूपी के सीएम पद की शपथ ली थी. इसके कुछ ही महीने बाद उन्होंने सरकार के आला अफसरों के साथ एक बैठक की. इसमें उन्होंने मुख्य सचिव को SC/ST एक्ट के क्रियान्वयन में विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया था. मायावती ने बतौर मुख्यमंत्री कहा था कि कभी-कभी दबंग लोग आपसी दुश्मनी के कारण इस एक्ट का सहारा लेकर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को मोहरा बनाकर उन पर केस दर्ज करा देते हैं. ऐसे मामलों में सत्यता की जांच करने के बाद ही केस दर्ज किया जाए. प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि इस एक्ट का कतई दुरुपयोग न हो. इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने सरकार की ओर से SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को रोकने वाला शासनादेश जारी किया था. इस आदेश की कॉपी हमारे सहयोगी चैनल जी न्यूज के पास है.

2007 में यूपी सरकार द्वारा जारी शासनादेश. (फोटो साभारः जीन्यूज)
2007 में यूपी सरकार द्वारा जारी शासनादेश. (फोटो साभारः जीन्यूज)

 

आदेश में कहा गया था, जांच करें ताकि निर्दोष परेशान न हो
यूपी के तत्कालीन मुख्य सचिव की ओर से 29 अक्टूबर 2007 को जारी सरकार के इस शासनादेश में SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट तौर पर कहा गया था. इसमें कहा गया था कि SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम को पूरी निष्ठा से लागू किया जाए. इस समाज के लोगों का उत्पीड़न न हो और उन्हें त्वरित न्याय मिले, यह सुनिश्चित किया जाए. अधिनियम के तहत अपराध की सूचना के दर्ज होने के बाद इसका गंभीरतापूर्वक अन्वेषण, परीक्षण किया जाए. इसके बाद साक्ष्य के आधार पर विधिक कार्यवाही की जाए. हत्या, बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में एसपी, एसएसपी खुद संज्ञान लेकर इसकी विवेचना, जांच और परीक्षण प्राथमिकता के आधार पर अपनी देखरेख में पूरी कराएं. शासनादेश में कहा गया था कि अनुसूचित जाति और जनजाति के किसी भी व्यक्ति के उत्पीड़न के मामले में त्वरित न्याय दिलाने के साथ यह ध्यान रखा जाए कि किसी निर्दोष को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े. साथ ही अगर आरोप झूठा साबित हो जाए तो आरोप लगाने वाले पर धारा 182 के तहत कार्रवाई की जाए.

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अब बदल गया बसपा सुप्रीमो का बयान
सोमवार को भारत बंद के दौरान फैली हिंसा के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SC/ST एक्ट को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि यह आक्रोश इस कानून को निष्प्रभावी बनाने के खिलाफ है. उन्होंने कहा था कि अगर केंद्र सरकार ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की होती तो भारत बंद की नौबत ही नहीं आती. हालांकि मायावती ने बंद के दौरान हिंसा की निंदा करते हुए कहा था कि कुछ गैर-आंदोलनकारी लोगों ने आगजनी और हिंसा को अंजाम दिया. मीडिया के साथ बातचीत करते हुए मायावती ने कहा था कि भारत बंद जैसे आंदोलनों की तीव्रता से मजबूर होकर ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बहुत देर से पुनर्विचार याचिका दायर की. उन्होंने कहा था कि सरकारी प्रयास दिखावटी या गुमराह करने वाला नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकार को पूरी तैयारी और मजबूती के साथ इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करके SC/ST एक्ट को असली रूप में बहाल कराना चाहिए.

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