लखनऊ: 1 अप्रैल 2018 से नेशनल ई – वे बिल व्यवस्था लागू. जीएसटी काउंसिल द्वारा दिनांक 1 अप्रैल 2018 से पूरे देश में मालों के अंतर प्रांतीय संव्यवहार (Interstate transactions) के लिए नेशनल ई- वे बिल लागू करने का निर्णय लिया गया है .प्रांतीय संव्यवहार ( Intrastate transactions) के लिए ई- वे बिल चरणबद्ध तरीके से बाद की तिथियों में लागू किया जाएगा.

संशोधन एक अप्रैल 2018 से प्रभावी

ई- वे बिल की यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर नियमावली 2017 के संशोधित नियम 138 द्वारा लागू की गई है तथा यह संशोधन एक अप्रैल 2018 से प्रभावी किया गया है. संशोधन से पूर्व लागू नियम 138 में सरकार को जीएसटी काउंसिल द्वारा अनुमोदित ई-वे बिल व्यवस्था लागू होने तक ,विज्ञप्ति के माध्यम से मालों के परिवहन के लिए ई-वे बिल लागू करने का अधिकार प्राप्त था . इन्हीं अधिकारों के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राज्य में ई -वे बिल 01, ई-वे बिल 02, ई-वे बिल 03 तथा ई-वे बिल टीड़ीएफ व्यवस्था लागू की गई थी.
दिनांक 1 अप्रैल 2018 से संशोधित नियम 138 प्रभावी होंगे तथा संशोधित नियम में प्रावधानित ई-वे बिल दिनांक 1 अप्रैल 2018 से लागू हो जाएगा. जिस के उपरांत पूर्व में राज्य सरकार द्वारा विज्ञापित उक्त ई वे बिल व्यवस्था प्रभावी नहीं रहेगी.

माल के परिवहन से पूर्व ई – वे बिल जनरेट किया जाना आवश्यक

दिनांक 1 अप्रैल 2018 से प्रभावी हो रही उत्तर प्रदेश माल सेवा एवं कर नियमावली का संशोधन नियम 138 के अनुसार माल के परिवहन से पूर्व ई – वे बिल जनरेट किया जाना आवश्यक होगा, लेकिन दिनांक 31/3/ 2018 की मध्य रात्रि तक जिन मालों का परिवहन आरंभ हो चुका है उनके संबंध में नेशनल ई- वे बिल डाउनलोड किया जाना अपेक्षित नहीं है. उक्त के दृष्टिगत जांच के दौरान 31/03/ 2018 की मध्यरात्रि से पूर्व परिवहन आरंभ कर चुके वाहनों के साथ दिनांक 31/03/ 18 तक विभागीय प्रांतीय वेबसाइट www.comtax.up.nic.in से डाउनलोड किए गए वैध ई-वे बिल 01,ई- वे बिल 02,ई-वे बिल 03 तथा ई-वे बिल टीडीएफ उपलब्ध होने की दशा में ऐसे वाहनों को रोका नहीं जाएगा.

व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है ये जानकारी

नॉन जीएसटी गुड्स अर्थात पेट्रोल, डीजल, एविएशन टरबाइन फ्यूल , नेचुरल गैस, क्रूड ऑयल तथा एल्कोहलिक लिकर फॉर ह्यूमन कंजम्प्शन के लिए नेशनल ई – वे बिल लागू नहीं होगा, इन वस्तुओं के संबंध में उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम 2008 द्वारा प्रावधानित ई – संचरण की व्यवस्था लागू होगी. यह ई-संचरण उत्तर प्रदेश की वेबसाइट www.comtax.up.nic.in से डाउनलोड किए जा सकेंगे.
गौरतलब है कि किसी पंजीकृत व्यक्ति द्वारा रुपए 50 हजार से अधिक मूल्य के माल का परिवहन प्रारंभ करने के पूर्व कंसाइनर अथवा कंसाइनी को ई- वे बिल डाउनलोड किया जाना अनिवार्य है. नॉन मोटराइज्ड वाहन से किए जाने वाले माल के परिवहन के लिए ई – वे बिल डाउनलोड करना अनिवार्य नहीं है, परंतु यदि माल का परिवहन रेलवे के माध्यम से किया गया है तो माल की डिलीवरी लेने से पहले ई- वे बिल जनरेट करना अनिवार्य होगा.

इन कैटेगरी पर अपेक्षित नहीं है ई-वे बिल

1 अप्रैल 2018 से लागू हो रहा नेशनल ई- वे बिल निम्न श्रेणी की वस्तुओं के परिवहन हेतु अपेक्षित नहीं होगा –
* जीएसटी के अंतर्गत कर मुक्त श्रेणी की सभी वस्तुएं Deoiled cake को छोड़कर.
* चैप्टर 71 के अंतर्गत वर्गीकृत बहुमूल्य धातुएं तथा सोने चांदी के आभूषण .
*घरेलू उपयोग हेतु LPG.
* पीडीएस सिस्टम के तहत वितरण हेतु केरोसिन.
* भारतीय मुद्रा.
* पुराना प्रयुक्त निजी एवं घरेलू सामान .
*पोस्टल विभाग के पोस्टल बैगेज.

उप आयुक्त वाणिज्य कर दीप्ति कटियार ने बताया कि- नेशनल ई- वे बिल व्यवस्था के अंतर्गत उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मेल आई डी /मोबाइल नंबर पर मेल या SMS द्वारा अलर्ट भेजे जाने की व्यवस्था की गई है.प्रत्येक उपभोक्ता अपने जनरेट किए गए ई-वे बिल की मॉनिटरिंग भी कर सकता है.
इसके पूर्व जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार ने बताया कि अभी तक ई – वे बिल प्लेटफार्म पर करीब 11 लाख इकाइयां ही पंजीकृत हुई है. ई – वे बिल व्यवस्था में व्यवसाइयों को किसी राज्य के भीतर या उसके बाहर पचास हजार से अधिक दाम के माल की ढुलाई के लिए जीएसटी निरीक्षक के सामने ई वे बिल पेश करना आवश्यक होगा.

जीएसटीएन पोर्टल पूरी तरह तैयार

केंद्रीय वित्त सचिव हंसमुख अढ़िया ने भी अपने वक्तव्य में यह कहा है कि उपरोक्त ई – वे बिल व्यवस्था को लागू करने के लिए जीएसटीएन पोर्टल पूरी तरीके से तैयार है.
केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा है कि वह एक सरल जीएसटी संरचना चाहते हैं, उनका कहना है कि एक बार जब अप्रत्यक्ष कर के मद में आमदनी ठीक होने लगेगी तो इसे भविष्य में और सरल किया जा सकेगा .