नई दिल्लीः ताजमहल के मालिकाना हक का दावा करने वाले उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना स्टैंड बदल लिया है. वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को कहा कि ताजमहल का असली मालिक खुदा है. कोई सम्पति जब वक्फ को दी जाती है, वो खुदा की संपत्ति बन जाती है.सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में बोर्ड ने कहा कि कोई भी मनुष्य ताजमहल का मालिकाना हक नहीं जता सकता. ये सर्वशक्तिमान की संपत्ति है. बोर्ड ने कहा कि हम मालिकाना हक नहीं मांग रहे सिर्फ ताजमहल के रखरखाव का हक मांग रहे हैं.

गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड से कहा था कि विश्व धरोहर ताजमहल पर अपना मालिकाना हक साबित करने के लिए मुगल बादशाह शाहजहां के साइन वाले दस्तावेज दिखाए. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने वक्फ बोर्ड के वकील से कहा कि इस दावे के समर्थन में दस्तावेज दिखाएं कि अपनी बेगम मुमताज महल की याद में 1631 में ताज महल का निर्माण करने वाले शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ‘वक्फनामा’ कर दिया था. वक्फनामा एक ऐसा प्रलेख या दस्तावेज है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति या भूमि धर्मार्थ कार्यो या वक्फ के लिये दान देने की मंशा जाहिर करता है.

पीठ ने कहा , ‘ भारत में कौन विश्वास करेगा कि ताज वक्फ बोर्ड का है. पीठ ने कहा कि इस तरह के मसलों को शीर्ष अदालत का वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए. वक्फ बोर्ड के वकील ने जब यह कहा कि शाहजहां ने स्वंय इसे वक्फ की संपत्ति घोषित की थी तो पीठ ने बोर्ड से कहा कि मुगल शहंशाह द्वारा निष्पादित मूल प्रलेख दिखाया जाए. इस पर बोर्ड के वकील ने संबंधित दस्तावेज पेश करने के लिए कोर्ट से कुछ वक्त देने का अनुरोध किया था.

शीर्ष अदालत ऐतिहासिक स्मारक ताज महल को वक्फ की संपत्ति घोषित करने के बोर्ड के फैसले के खिलाफ पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 2010 में दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी. पीठ ने सवाल किया कि शाहजहां खुद कैदे दस्तावेज पर दस्तखत कर सकता था जब उत्तराधिकार को लेकर हुई लड़ाई में उसे ही उसके बेटे औरंगजेब ने आगरा के किले में 1658 में कैद कर लिया था. इस किले में ही शाह जहां की 1666 में मृत्यु हो गयी थी.

पीठ ने बोर्ड के वकील से कहा कि मुगलों द्वारा निर्मित 17 वीं सदी के स्मारक और दूसरी धरोहरों को मुगल शासन के बाद ब्रिटिश ने अपने कब्जे में ले लिया था. भारत की आजादी के बाद यह स्मारक भारत सरकार के अंतर्गत आ गये थे और पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ही इनकी देखरेख कर रहा है.पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वकील का कहना था कि इस तरह का कोई वक्फनामा नहीं है.

न्यायालय ने इसके बाद इस मामले की सुनवाई 17 अप्रैल के लिये स्थगित कर दी. शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ताजमहल को प्रदूषित गैसों और वृक्षों की कटाई से होने वाले दुष्प्रभावों से बचाने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. शीर्ष अदालत यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ताजमहल और इसके आसपास के क्षेत्र के विकास की निगरानी कर रही है.