कानपुर: एससी/एसटी एक्ट में किए गए बदलाव के चलते पूरे देश में बवाल के बाद अब दलित संगठनों ने एक्ट के मूल स्वरुप को बचाने के लिए नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं. कानपुर में भारतीय दलित पैंथर पार्टी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक्ट में बदलाव नहीं किए जाने को लेकर अपने खून से पत्र लिखा है.

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एक्ट को पुनः उसी स्थिति में करने की मांग
भारतीय दलित पैंथर पार्टी ने खून से पत्र लिख एक्ट के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अपील की है. उन्होंने लिखा है कि ‘महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को संसद में अध्यादेश द्वारा क़ानून बनाकर पुनः पूर्व की स्थिति में कर अधिनियम को बहाल किया जाए.’ इसके अलावा भारत बंद के दौरान हिंसा में मारे गए प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि दी. पार्टी के धनीराम बौद्ध ने बताया कि उन्होंने व उनकी पार्टी के लोगों ने खून एकत्रित कर ये पत्र लिखा है. देश के शीर्ष नेताओं से इसमें दखल की मांग की है. अगर कोई सुनवाई नहीं होती है तो वह फिर से इसी तरह से कदम उठाकर एससी/एसटी एक्ट के उसी स्वरूप की बहाली की मांग करेंगे.

भारत बंद के दौरान जमकर हुआ था बवाल
बता दें कि एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट को कथित तौर पर कमजोर करने के विरोध में 2 अप्रैल को भारत बंद किया गया था. इस दौरान देश के कई राज्यों में हिंसा फैल गई थी. इसमें कुल सात लोगों की मौत हुई थी. कई लोग घायल हो गए थे. प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन की पटरियों तक को नुकसान पहुँचाया था. यूपी के कई शहरों में सरकारी बसों व निजी वाहनों में आग लगा दी गई थी.