लखनऊ: यूपी के झांसी में इनामी बदमाश और इंस्पेक्टर से एनकाउंटर मैनेज करने की बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद अब एक और नया कथित ऑडियो वायरल हो रहा है. ऑडियो में सस्पेंड किए गए इंस्पेक्टर सुनीत कुमार और बीजेपी के झांसी जिलाध्यक्ष संजय दुबे के बीच बातचीत है. इस ऑडियो को लेकर अब तक बीजेपी जिलाध्यक्ष की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ आज झांसी के दौरे पर हैं.

बीजेपी ज़िलाध्यक्ष इंस्पेक्टर से बोले- दुश्मन को कहकर मारता हूं
नए ऑडियो में बीजेपी के जिलाध्यक्ष संजय दुबे इंस्पेक्टर से बात कर रहे हैं. वह कह रहे हैं कि ‘वह (बदमाश) इतना ताकतवर है कि उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है. मैं कुछ नहीं जानता सुनीत जी, आज की डेट में गिरफ्तारी चाहिए. अगर गिरफ्तारी नहीं हुई तो मैं कसम ईश्वर की खा रहा हूं कि कप्तान के यहां धरने पर बैठ जाऊंगा. और नाटक हो जाएगा तगड़ा. फिर मुझसे नहीं कहना. मेरी एक आदत है कि मैं दुश्मन को भी कहकर मारता हूं.’

इंस्पेक्टर ने बदमाश से कहा था- मैं भी अपराधी हूं
बता दें कि 14 अप्रैल शनिवार को झांसी के मऊरानीपुर थाना के इंस्पेक्टर सुनीत कुमार और इनामी बदमाश लेखराज सिंह के बीच बातचीत का एक ऑडियो सामने आया था. इस ऑडियो में इंस्पेक्टर सुनीत कुमार सिंह बदमाश से कह रहा था कि ‘मैं भी पुराना अपराधी हूं. आप भले आदमी हैं. कोई कुछ नहीं कर पाएगा.’ इंस्पेक्टर ने कहा था कि बीजेपी विधायक राजीव सिंह और जिलाध्यक्ष संजय दुबे को संभाल लो, तो बच जाओगे. इस ऑडियो के वायरल होने के एक दिन पहले ही 13 अप्रैल को इनामी बदमाश के साथ मुठभेड़ का दावा किया था. इससे मुठभेड़ के दावों पर ही सवाल खड़े हो गए थे. उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने इस मामले को संज्ञान में लिया था. रविवार को उन्होंने कहा था कि सस्पेंड किए गए एसएचओ को नौकरी से हटाने की भी योजना बनाई जा रही है.

इससे पहले एसओ सुनीत सिंह और इनामी बदमाश लेखराज सिंह का ऑडियो वायरल हुआ था. (दोनों की फाइल फोटो)
इससे पहले एसओ सुनीत सिंह और इनामी बदमाश लेखराज सिंह का ऑडियो वायरल हुआ था. (दोनों की फाइल फोटो)

इंस्पेक्टर और बदमाश के बीच ऑडियो में इस तरह हुई थी बातचीत…

बदमाश: ऑडियो में इनामी बदमाश द्वारा कहा जा रहा है कि अरे मदद करो यार, मदद करो.
इंस्पेक्टर: दो भाजपा नेताओं (विधायक सहित) को मैनेज करो आप.
बदमाश: तो सुनीत सिंह (इंस्पेक्टर) किसी से कम हैं क्या.

इंस्पेक्टर: मेरी बात समझिए अब मेरे बस का नहीं है. मेरे बस से बाहर है.
बदमाश: तो क्या तुम्हें डाकघर में बैठा दें. इतने बहादुर अधिकारी को क्या डाकघर में भेज दें.

इंस्पेक्टर: अरे, हम तो अपराधी रहे शुरू से और रहेंगे. (कहकहा लगता है) जाने कितने मार के फेंक दिए किनारे. जाने कितनी बार जेल काटे हैं. सब निपट गया मां की कृपा से. इतिहास हमारा बहुत खराब है. अब भविष्य अच्छा है.
बदमाश: हमारी मदद करो अब जो है. अरे कोई गलत काम है हमारा बताइए आप.

इंस्पेक्टर: अरे ओफ्फो, मदद, आपकी मदद तो ऊपर वाला कर रहा है. मेरी बात सुनिए. आप बढ़िया आदमी हैं. गलत काम कोई नहीं होता है. पिछले 14 सालों में कितने एनकाउंटर हुए यूपी भर में? नहीं हुए न. अब दौर चल रहा है. आपकी लोकेशन ट्रेस हो रही है.

बदमाश: तो अधिकारी कह रहे हैं कि मेरा एनकाउंटर कर दो. मदद करो हमारी नाती पोता हैं.
इंस्पेक्टर: अरे चीज़ों को समझिए. आफत यहीं फंस रही है. हम तो मदद करना चाहते हैं. हमने चंद्रपाल जी से कहा कि देखिए मदद करिए उनकी.

बदमाश: अरे यार इंस्पेक्टर इतना बड़ा होता है मदद करो.
इंस्पेक्टर: देखो सपा सरकार में भी आप जेल गए थे. गए या नहीं गए. विक्रम जब था. (विक्रम सिंह जिन इंस्पेक्टर ने इस इनामी बदमाश को जेल भेजा था) आपके ऊपर 60 मुक़दमे है. आप सबसे फिट है एनकाउंटर के लिए. ये मान लीजिए. अब आपकी मदद कौन करेगा ये आप जानो. आप, आपका लड़का, आपके गुर्गे हैं जितने…

बदमाश: हां, सब मारे जाएंगे.
इंस्पेक्टर: पट-पट-पट सब मारे जाएंगे. सरकार के हिसाब से काम करिए.

बदमाश: देखिए इंस्पेक्टर मुकदमा झूठा है. रिट लगाएगा तो झूठी थोड़े लगाएगा.
इंस्पेक्टर: देखिए हम तो आपको बता ही सकते हैं.

बदमाश: इतने छोटे मुक़दमे में मरना थोड़े ही हैं.
इंस्पेक्टर: देखिए फिर पंचायत फंसेगी तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे. इस मामले को निपटाओ आप.

बदमाश: अच्छा तो सीधे एनकाउंटर के आदेश हैं.
इंस्पेक्टर: हंसते हुए.. अब हम कुछ नहीं कहेंगे. जब होगा तब देखा जाएगा.