ललितपुर: बुधवार 18 अप्रैल को हर कहीं अक्षय तृतीया की धूम होगी. जगह-जगह शादी समारोह होंगे. शहनाइयां गूंजेंगी, लेकिन एक जगह हैं, जहां ये दिन सन् 1850 के बाद से 150 साल से अधिक बीतने पर भी अब तक खोटा माना जाता है. यहां आज भी अक्षय तृतीया पर शहनाई नहीं बजती है. यूपी के ललितपुर जिले के तालबेहट में राजा मर्दन सिंह के पिता द्वारा रेप किए जाने के बाद शिकार हुईं सातों लड़कियों ने आत्महत्या कर ली थी. यह घटना अक्षय तृतीया के दिन हुई थी. इसके बाद से अब तक यहां के लोग अक्षय तृतीया नहीं मनाते हैं. अपने पिता की इस शर्मनाक हरकत पर शर्मिंदा राजा मर्दन सिंह ने सातों लड़कियों के चित्र महल के मुख्य द्वार पर बनवाए थे, जो आज भी मौजूद हैं.

नेग मांगने पहुंची लड़कियों से किया था रेप
ज़िला ललितपुर के राजशाही परिवार के द्वारा घटित हुई यह घटना बुंदलेखंड के शानदार अतीत पर दाग की तरह है. दरअसल, राजा मर्दन सिंह ने 1857 की क्रांति के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया था. सन् 1850 के आसपास राजा मर्दन सिंह ललितपुर के बानपुर इलाके के नरेश थे. वह तालबेहट (अब ललितपुर जिले का मुख्य क़स्बा) भी आते-जाते रहते थे. इसलिये राजा मर्दन सिंह ने ललितपुर के तालबेहट में एक महल बनवाया था. यहां उनके पिता प्रहलाद रहते थे. इतिहासकारों के अनुसार 1850 में अक्षय तृतीया का दिन था. नेग मांगने की रस्म होती थी. इसी रस्म को पूरा करने के लिये तालबेहट की सात लड़कियां राजा मर्दन सिंह के इस किले में पहुंची. इस दौरान राजा मर्दन सिंह के पिता प्रहलाद किले में अकेले थे. उन्होंने इन सातों लड़कियों को हवस का शिकार बना लिया. लड़कियों ने विरोध की कोशिश की, लेकिन राजशाही महल में उनकी नहीं चली.

किले में लोग जाना पसंद नहीं करते हैं.
किले में लोग जाना पसंद नहीं करते हैं.

 

रेप के बाद लड़कियों ने कर ली आत्महत्या
घटना के तुरंत बाद सातों लड़कियों ने महल की सबसे उंची बुर्ज पर चढ़कर छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी. सात लड़कियों की एक साथ मौत से हाहाकार मच गया था. जनता में बेहद आक्रोष था. जनता के आक्रोश को देखते हुये राजा मर्दन सिंह ने अपने पिता प्रहलाद को महल से वापस लिया. वह अपने पिता द्वारा की गयी इस घटना से दुखी थे. समाजसेवी व पत्रकार कुंदन पाल बताते हैं कि राजा मर्दन सिंह ने श्रद्धांजलि देते हुये किले के मुख्य द्वार पर इन सात लड़कियों के चित्र बनवाये थे, जो आज भी मौजूद हैं.

किले के द्वार पर राजा द्वारा सातों लड़कियों के चित्र बनवाए गए थे.
किले के द्वार पर राजा द्वारा सातों लड़कियों के चित्र बनवाए गए थे.

 

लड़कियों के चित्रों की होती है पूजा, नहीं मनाते अक्षय तृतीया
150 सालों से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन कहा जाता है कि इन लड़कियों की आत्मा आज भी भटकती है. लोग रात में किले के रास्ते से नहीं गुजरते हैं. तालबेहट निवासी सुरेंद्र सिंह यादव बताते हैं कि यह किला अशुभ माना जाता है. देख-रेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो गया है. लोग इस घटना के कारण इस किले से नफरत करते हैं. ललितपुर के रहने वाले संतोष पाठक बताते हैं कि ललितपुर में अक्षय तृतीया के दिन को अशुभ माना जाता है. इस दिन महिलाएं किले के मुख्य द्वार पर बने सातों लड़कियों के चित्र की पूजा-अर्चना करने जाती हैं.