लखनऊ: उन्नाव गैंग रेप मामले में पीड़िता के चाचा ने ख़ुशी ज़ाहिर की है. उन्होंने कहा कि ‘उन्हें ये जानकर ख़ुशी है कि सीबीआई ने विधायक को अरेस्ट कर लिया है. सीबीआई देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी है. अगर सीबीआई जांच न करती और इसकी जांच व्यवस्था पर यकीन होना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता तो हम देश छोड़ चुके होते. विश्वास नहीं होने पर हमें देश छोड़ देना चाहिए.’ पीड़ित के चाचा ने कहा कि ‘विधायक ने मेरे भाई को मारा, सभी अधिकारी और पुलिस जो इस अपराध में शामिल हैं, उन्हें जेल भेजा जाए.’ वहीं, सीबीआई आज आरोपी विधायक को सीबीआई कोर्ट में पेश करेगी. बताया जा रहा है कि सीबीआई आरोपी विधायक को 14 दिन की रिमांड पर ले सकती है. इसके लिए कागज़ात तैयार कराए जा रहे हैं.

कोर्ट में विधायक को पेश करेगी सीबीआई
इससे पहले सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में नाबालिग लड़की से कथित बलात्कार की घटना को लेकर भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को शुक्रवार (13 अप्रैल) को गिरफ्तार कर लिया. इससे पहले सीबीआई ने सेंगर से करीब 18 घंटे तक पूछताछ की थी और फिर हिरासत में लिया था. आज सीबीआई विधायक को रिमांड की डिमांड कर सकती है. सूत्रों के अनुसार विधायक को 14 दिन की रिमांड पर लेने की तैयारी है. इसके कागज़ात तैयार कराए जा रहे हैं. सीबीआई आज विधायक को कोर्ट में पेश करेगी.


मामले में दर्ज हैं तीन एफआईआर
सीबीआई ने इस मामले में पहली प्राथमिकी कथित बलात्कार के संबंध में है जिसमें सेंगर और एक महिला शशि सिंह आरोपी हैं. दूसरी प्राथमिकी हिंसा से और पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत से संबंधित है. हिंसा मामले में चार स्थानीय लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, चूंकि पुलिस ने हत्या के आरोप बाद में जोड़े हैं, इसलिए ये सीबीआई की प्राथमिकी में दर्ज नहीं है. तीसरा मामला पीड़िता के पिता के खिलाफ उन आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन्हें शस्त्र कानून के तहत गिरफ्तार करके स्थानीय पुलिस ने जेल में बंद कर दिया था. वहां रहस्यमयी हालत में उनकी मौत हो गई थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चोट के निशान पाए जाने की बात सामने आई है.

ये भी पढ़ें: उन्नाव रेप केस: अर्श से फर्श पर पहुंची सत्ता की हनक, सीबीआई के सामने फफक कर रो दिए विधायक

ये है मामला
पीड़िता का आरोप है कि विधायक ने चार जून 2017 में अपने आवास पर उसके साथ दुष्कर्म किया था. पीड़िता के पिता की विधायक के भाई तथा अन्य की कथित तौर पर मारपीट के बाद करीब एक सप्ताह के बाद न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी. पिता की मौत के एक दिन पहले ही पीड़िता ने सीएम आवास के सामने सुसाइड का प्रयास किया था. इसके बाद भी राज्य सरकार ने विधायक पर केस दर्ज करने से मना कर दिया था. मचते बवाल के बीच हाईकोर्ट की फटकार के बाद आरोपी विधायक को पर कार्रवाई की गई.