लखनऊ. यूपी में जिस संदिग्ध पदार्थ को लेकर प्रदेश से लेकर देश में शोर मचा, वह दरअसल विस्फोटक था ही नहीं. इस पदार्थ को घातक पीईटीएन बताया गया था. खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसपर सदन को संबोधित कर सुरक्षा चाक चौबंद करने की बात कही थी. लेकिन अब जांच में साफ हो गया है कि वह पाउडर पीईटीएन नहीं था.

उत्तर प्रदेश की विधानसभा में पिछले हफ्ते 12 जुलाई संदिग्ध पाउडर मिला था. आगरा फॉरेंसिक लैब की एक्सप्लोसिव रिपोर्ट में उसकी सत्यता का खुलासा हुआ है. इससे पहले राज्य सरकार ने इस संदिग्ध पाउडर को पीईटीएन बताया था, जो कि एक बेहद खतरनाक प्लास्टिक विस्फोटक है. जानकार मानते हैं कि इस विस्फोटक के बारे में डॉग स्क्वॉड भी पता नहीं लगा सकते. माना जाता है कि 2011 में दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर धमाके में इस विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था.

एबीपी न्यूज़ के मुताबिक, आगरा फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में बताया गया है कि विधायक की सीट के नीचे से मिले पाउडर में विस्फोटक नहीं है. इस पाउडर की जांच लैब के चार वरिष्ठ वैज्ञानिकों की टीम ने की थी जिसकी अगुआई लैब के डिप्टी डायरेक्टर एके मित्तल ने की. लैब रिपोर्ट के मुताबिक, पाउडर में किसी भी विस्फोटक के कण नहीं मिले हैं.

यूपी सरकार की सफाई

हालांकि यूपी सरकार ने सफाई देते हुए कहा है कि यूपी विधानसभा में मिले पाउडर को जांच के लिए आगरा की फ़ॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में भेजा ही नहीं गया था, क्योंकि उनके पास ये टेस्ट करने की सुविधा ही नहीं है. सरकार का कहना है कि लखनऊ की फॉरेंसिक साइंस लैब ने 14 जुलाई को की गई शुरुआती जांच के बाद संदिग्ध पाउडर में पीइटीएन विस्फोटक मिलने की पुष्टि की थी. संदिग्ध पाउडर विस्फोटक था या नहीं ये पता करने के लिए एसएफएसएल लखनऊ-इनफ्रेरेड स्पेक्ट्रम और गैस क्रोमेटोग्राफी-मास स्प्रैक्टम में जांच चल रही है. उम्मीद है कि इसकी रिपोर्ट गुरुवार तक आ जाएगी.

बता दें कि विधानसभा में इस विस्फोटक मिलने की जानकारी के बाद उत्तर प्रदेश एटीएस ने इस संदिग्ध पाउडर के नमूने जांच के लिए आगरा और हैदराबाद भेजे थे. आगरा की लैब ने अपनी रिपोर्ट पुलिस के बड़े अफसरों को भेजी है. यूपी विधानसभा में विस्फोटक मिलने के बाद विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे एक आतंकी साजिश का हिस्सा बताया था.