गुजरात में चुनावी मौसम के बीच यूपी के मुख्यमंत्री और फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी क्या इशारा करती है? बीजेपी में उभरते हुए नए नेतृत्व के रूप में अपनी पहचान बनाते जा रहे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को गुजरात की यात्रा पर हैं. योगी इससे पहले केरल में जनरक्षा यात्रा की भी अगुवाई कर चुके हैं. आखिर क्या वजह है कि बीजेपी उन्हें यूपी से निकालकर देश के अलग अलग राज्यों में पार्टी के अभियानों की अगुवाई करने के लिए भेज रही है. आइए कुछ वजहों पर प्रकाश डालते हैं-

हिंदुत्ववाद का नाराः गुजरात में बीजेपी पटेल वोटबैंक खिसकने का डर लेकर मैदान में उतर रही है. दलित उत्पीड़न ने भी पार्टी के खिलाफ हवा तेज की है. गुजरात में गोधरा केस पर फैसले ने मुस्लिमों के जहन में 2002 उभार दिया है. ये सब फैक्टर्स तो हैं ही, साथ में राज्य में पार्टी के खिलाफ एंटी इन्कंबेसी भी हावी बताई जा रही है. फायर ब्रांड हिंदू नेता की छवि रखने वाले योगी जाति-समूहों में बंटे हिंदू धर्म को एकजुट कर सकते हैं.

आरएसएस में एकमतः एक्सपर्ट मानते हैं कि यूपी में सीएम के नाम के चयन पर संघ ने ही अंतिम मुहर लगाई थी. मीडिया रिपोर्ट्स में मनोज सिन्हा के नाम पर मुहर लगना बताया जा रहा था लेकिन ऐन मौके पर योगी आदित्यनाथ का नाम सामने आ गया. संघ के प्रिय योगी ऐसे नेतृत्व पर फिट बैठते हैं, जिसकी कल्पना संघ ने कर रखी है. यही वजह है कि आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व ने भी योगी पर कभी ऐतराज नहीं जताया है.

मोदी वर्तमान, योगी भविष्यः आपको जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला का वो ट्वीट जरूर याद होगा जिसमें उन्होंने विपक्ष से 2024 की तैयारी करने को कहा था. उमर ने साफ साफ कह दिया था कि मोदी का सामना 2019 में करना विपक्ष के बूते की बात नहीं. अब जब विपक्ष का ध्यान 2024 या उसके बाद के लोकसभा चुनाव पर है, तो संघ भला कैसे पीछे रह सकता है. मोदी से लगभग 20 साल आयु में छोटे योगी को वह धीरे धीरे ऐसी भूमिका में लाने की तैयारी कर चुकी है, जिसके दम पर लोकसभा चुनावों में देश की जनता एकमत से वोट दे.

छवि पर भरोसाः योगी का पहनावा, खान पान, रहन सहन सब एक योगी की तरह ही है. इस सादे जीवन पर किसी को संदेह भी नहीं है. भारत जैसे देश में जहां सत्ता में पहुंचते ही नेता अपनो को सेट करना शुरू कर देते हैं, मोदी-योगी विश्वास जगाते हैं. भरोसा बढ़ाते हैं. इसी इमेज को संघ भुनाने की पुरजोर कोशिश में जुटा हुआ है. संघ यह भलिभांति जानता है कि योगी जैसे नेता पर जनता विश्वास करने में नहीं चूकने वाली.

यूपी से गुजरता है केंद्र का रास्ताः यूपी ने न सिर्फ देश को सबसे अधिक प्रधानमंत्री दिए हैं बल्कि केंद्र की सत्ता तक पहुंचने के लिए भी इस राज्य में अधिक संख्या में सीटें जीतना जरूरी होता है. बीजेपी ने यहां से सहयोगियों के साथ 73 सीटें जीतीं और पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने में कामयाब रही. अब जब विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को यहां से दो तिहाई सीटें मिल चुकी हैं और सीएम-पीएम भी इसी राज्य से हैं तो संघ इस राज्य पर दांव क्यों नहीं लगाएगा.