लखनऊ. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को यूपी की राजधानी लखनऊ पहुंच रहे हैं. उनका यह दौरा ऐसे समय पर है जब पार्टी के कई दलित सांसदों ने केंद्र सरकार के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नाखुशी जाहिर की है. वहीं, दूसरी तरफ पार्टी के एक विधायक पर रेप और हत्या का आरोप लगा है. हालांकि, संगठन के नजरिए से देखें तो इसी हफ्ते बसपा और सपा से कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल हुए हैं और पार्टी को मजबूती मिली है. बताया जा रहा है कि अमित शाह इन नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं.

दलित सांसदों की नाराजगी
एससी/एक्ट में संशोधन और देश में दलितों पर हो रहे कथित हमलों के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर बीजेपी के ही चार दलित सांसदों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ये चारों सांसद सावित्रीबाई फुले, छोटे लाल खरवार, अशोक दोहरे और यशवंत सिंह योगी आदित्यनाथ से भी संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं. यह बीजेपी के लिए चिंता का विषय है. अगले साल आम चुनाव होने हैं और कहते हैं कि दिल्ली की सत्ता यूपी से होकर ही जाती है. ऐसे में अमित शाह यूपी से पार्टी की पकड़ को किसी भी स्थिति में खोना नहीं चाहते हैं.

विधायक पर रेप का आरोप
दूसरी तरफ बांगरमऊ से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर रेप का आरोप लगने के बाद सियासी हड़कंप मचा हुआ है. पीड़िता के पिता की मौत के बाद इस मुद्दे ने और तूल पकड़ लिया है. ऐसे में यह बीजेपी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नारे पर भी पलीता लगाता दिख रहा है.

संघ की रिपोर्ट
वहीं, संघ के दो उच्च पदाधिकारियों ने भी यूपी का तीन दिवसीय दौरा करके अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट सौंपा है. संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी कृष्ण गोपाल और दत्तात्रेय होसबोले ने राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, पार्टी के पदाधिकारियों, संघ के नेताओं और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि वे सरकार और बीजेपी नेताओं के काम-काज से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं.

बीजेपी में शामिल हुए नेता
हालांकि, इस बीच बीजेपी के लिए खुशी की बात रही कि दो दिन पहले ही बीएसपी और सपा के 28 बड़े नेता पार्टी में शामिल हुए हैं. इनमें एक पूर्व सांसद, एक पूर्व विधायक, एक पुर्व एमएलसी, कई पूर्व प्रत्याशी और नगर पालिका परिषदों के चेयरमैन शामिल हैं. इसमें कई नेता दलित और पिछड़ा समुदाय से आते हैं. ऐसे में इनसे उन्हें फायदा मिल सकता है.

ऐसे ही नहीं महत्वपूर्ण है यह दौरा
कई विषम परिस्थिति के बीच अमित शाह का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण है. एक तरफ साल 2019 के चुनाव की तैयारी को देखते हुए सरकार और संगठन में जान फूंकना है तो दूसरी तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ से दलित सांसदों की असंतुष्टि को भी दूर करना है. साथ ही विधायक पर लगे आरोप के बाद सरकार पर लग रहे आरोपों पर वह क्या स्टैंड लेते है ये काफी महत्वपूर्ण होगा.