लखनऊ: प्रदेश सरकार ने प्राइवेट स्‍कूलों पर फीस बढ़ोत्तरी को लेकर शिकंजा कसना शुरू किया तो प्राइवेट स्कूल विरोध में उतर आए. आरटीई के खिलाफ प्राइवेट स्‍कूलों ने आज (शनिवार) को स्कूल बंद करने की घोषणा की है. इस बंद में अनऐडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के तले 65 प्राइवेट और मिशनरी स्कूल शामिल है.

अनऐडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली के रामलीला मैदान में आज (शनिवार) को स्कूली संगठन देशव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे. हालांकि एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि स्कूल बंदी का फीस नियंत्रण अध्यादेश से लेना-देना नहीं है. बताया कि स्कूलों की मुख्य मांग है कि हर घटना में उन्हें आरोपी के रूप में पेश कर दिया जाता है, जो सही नहीं है.  आखिरकार स्कूल के संचालक, शिक्षक और कर्मी भी तो एक इंसान होते हैं. सरकार को हमारी सुरक्षा के लिये भी दिशा-निर्देश देने चाहिए.

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सरकार के खिलाफ नहीं है प्रदर्शन 

संगठन के सचिव ने स्पष्ट किया कि हमारा प्रदर्शन सरकार के खिलाफ नहीं है. ट्रेजरार सर्वेश कुमार गोयल ने कहा जब कोई घटना होती है तो दबाव में स्कूल पर एफआईआर दर्ज कर दी जाती है. फिर बाद में उस पर आरोप साबित नहीं होते. इन सब बातों को लेकर स्कूलों में भय व्याप्त हो जाता है.

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आरटीई का विरोध नहीं, अपात्र बच्चों का कर रहे विरोध  

एसोसिएशन की सदस्य गीता गांधी ने बताया कि राइट टू एजुकेशन के तहत स्कूलों में भेजे जा रहे 80 प्रतिशत से अधिक बच्चे इसके पात्र नहीं हैं. एक्ट में लिखा है कि 6 से 14 साल की आयु के बच्चों को एडमिशन दिया जाए जबकि प्रदेश सरकार इससे कम आयु के बच्चों को भेजती है. इसका एक्ट में कोई जिक्र नहीं है. साथ ही भुगतान के रूप में 450 रुपए दिये जाते हैं, इसका भी एक्ट में कोई उल्लेख नहीं है. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों पर सरकार कितना खर्च करती है वह इसका ऑडिट नहीं कराती. नियम के तहत स्कूल की फीस और सरकारी खर्च में जो कम है वह दिया जाना चाहिए. हम आरटीई का विरोध नहीं कर रहें, बस अपात्र बच्चों का विरोध कर रहे हैं. सरकार एक्ट में संशोधन करा दे तो हमें सब स्वीकार है