बेरूत/मॉस्को/यरूशलम: सीरिया की आर्मी ने विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके के पूर्वी घोउटा में ताजा हवाई हमले किए गए हैं. बता दें कि इस इलाके में रासायनिक हमलों में शनिवार को 80 से ज्यादा लोग मारे गए. सीरिया की सरकार और घोउटा में मौजूद विद्रोहियों के अंतिम धड़े जैश अल – इस्लाम के बीच संघर्ष विराम और वार्ता के बावजूद रविवार को के हवाई हमले हुए हैं. सीरिया के इस हिस्से में शनिवार को क्लोरिन गैस के हमलों  को लेकर दुनिया चिंतित है, लेकिन सरकार और उसके सहयोगी रूस ने इन दावों को फर्जी करार दिया है. पूर्वी घोउटा में विद्रोहियों के कब्जे में मौजूद अंतिम गढ़ दोउमा पर नियंत्रण के लिए प्रेसिडेंटट बशर अल – असद की सेना ने अभियान तेज कर दिया है.

बता दें कि दोनों पक्षों के बीच जैश अल – इस्लाम के लड़ाकों को बाहर निकालने के संबंध में हो रही बातचीत शुक्रवार को नाकाम हो गई. ब्रिटेन स्थित मानवाधिकार निगरानी संस्था ‘सीरियन ऑबजर्वेट्री फॉर ह्यूमन राइट्स’ के मुताबिक शुक्रवार से फिर शुरू हुए हवाई हमलों में अभी तक 80 लोग मारे गए हैं. डाउमा में शनिवार को फिर से हवाई हमले हुए थे, जिसमें 24 घंटे के अंदर 70 नागरिक मारे गए, जबकि 11 लोगों को सांस लेने की समस्या आई.

 केमिकल हथियारों के इस्तेमाल से रूस का इनकार
रूस ने इन दावों से इंकार किया कि सीरिया की सरकार ने पूर्वी घाउटा में विपक्षी ठिकानों को ध्वस्त करने में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया. अमेरिका ने कहा था कि किसी भी तरह के हमले की जिम्मेदारी रूस की है. रूसियन सेंटर फॉर रिकांसिलेशन ऑफ वारिंग साइड्स इन सीरिया के प्रमुख यूरी येवतुशेनको ने कहा, ” इस सूचना को हम पूरी तरह खारिज करते हैं.” समाचार एजेंसियों ने उनके हवाले से लिखा है, ”हम तैयार हैं, डाउमा के आतंकवादियों से मुक्त होते ही हम तुरंत वहां विकिरण , रासायनिक और जैविक विशेषज्ञों को भेजेंगे जो वहां से डाटा जुटाकर पुष्टि करेंगे कि ये दावे झूठे हैं.” डाउमा में शनिवार को फिर से हवाई हमले हुए थे, जिसमें 24 घंटे के अंदर 70 नागरिक मारे गए, जबकि 11 लोगों को सांस लेने की समस्या आई.

2017 केमिकल हमले में 80 लोग मारे गए थे
अप्रैल 2017 में विद्रोहियों के कब्जे वाले खान शेखून में केमिकल हमले में कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि, सीरिया अपने पास किसी भी तरह के केमिकल हथियार रखने की बात खारिज कर दी थी. असद सरकार ने कहा था कि वह स्वयं केमिकल हथियारों के खिलाफ है.

सीरिया पर रूहानी की टिप्पणी से नाराज हैं नेतन्याहू
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी द्वारा सीरिया में आतंवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाए जाने से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बेहद नाराज हैं. टिप्पणी के बाद ईरान पर पलटवार करते हुए नेतन्याहू ने ट्वीट किया है ,”मूर्खता की कोई सीमा नहीं है, ईरान का आतंकवादी शासन जो पूरे क्षेत्र में आतंकवाद फैलाता है, वह इजरायल पर आतंकवादी गतिविधियों का आरोप लगा रहा है.”

ईरान दे सकता है जानकारी
ईरान की सेना ‘रेवोल्यूशनरी गाडर्स’ की विदेशी शाखा का हवाला देते हुए नेतन्याहू ने शनिवार को कहा, ” यदि रूहानी को ईरानी कुद्स फोर्स द्वारा सीरिया में रोजाना चलाई  जा रही आतंकवादी और विध्वंसक गतिविधयों का पता नहीं है तो इजरायल उन्हें जानकारी मुहैया करा सकता है.”

इजरायल  की आतंकवादियों को मदद 
ईरानी राष्ट्रपति की वेबसाइट के अनुसार, इससे पहले अंकारा में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन के साथ सम्मेलन के दौरान रूहानी ने ”सीरिया में रोजाना आतंकवादियों को यहूदी शासन से मिलने वाले समर्थन की आलोचना की थी.” ईरान, सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल- असद के मुख्य समर्थकों में से एक है.