वाशिंगटन: फ्लोरिडा स्कूल में बड़े पैमाने पर की गई गोलीबारी के बाद अमेरिका में बंदूक संस्कृति के नियंत्रण को लेकर वाशिंगटन में सबसे बड़ा प्रदर्शन किया गया, लाखों लोगों ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. छात्रों द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान हर जगह रैलियां निकाली गईं. संसद में बैठे लोगों को प्रभावित करने के मद्देनजर वाशिंगटन के यूएस कैपिटल के सामने इसका मुख्य समारोह आयोजित किया गया. प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाई तख्तियों पर लिखा था, ‘‘हमारा मताधिकार, हमारा सबसे बड़ा हथियार हो.’’ प्रदर्शनकारी प्रमुख समारोह शुरू होने से करीब तीन घंटे पहले ही यहां पहुंच गए थे.

अमेरिका में आए दिन गोलीबारी की घटनाएं होती रहती हैं. कई बार स्कूल कॉलेज में सिरिफिरे छात्र द्वारा गोलीबारी की घटना की खबर आती रहती है. मार्च में ही अमेरिका के अलाबामा राज्य के एक हाई स्कूल में गोलीबारी हुई थी जिसमें एक छात्रा की मौत हो गई थी जबकि 17 वर्षीय छात्र घायल हो गया था. इनमें से एक छात्र ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी इस मार्च का समर्थन किया है.

इससे पहले फरवरी में भी अमेरिका के फ्लोरिडा के एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना में 17 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादातर छात्र थे. इस हादसे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्कूल में शिक्षकों को बंदूक देने की पैरवी की थी . ट्रंप ने स्कूल में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए स्कूली शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पास बंदूक रखने के प्रति समर्थन जताया था. ट्रंप ने कहा था, “यदि आपके शिक्षक के पास बंदूक होती, तो वह इस हमले को बहुत जल्दी खत्म कर सकते थे.”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि, ‘‘यदि कोई गलत व्यक्ति यह सोचेगा कि कमरे में किसी शख्स के पास हथियार है जिसे उस पर ताना जा सकता है, तो वह स्कूल में नहीं जाएगा. इस समस्या के हल का यही एकमात्र तरीका है.’’ उन्होंने कुछ चुनिंदा स्कूल शिक्षकों को हथियारों से लैस करने के अपने प्रस्ताव की आलोचना पर जवाब देते हुए कहा था कि, ‘‘बंदूकों से मुक्त जगहें बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा क्योंकि वे वहां पहुंच जाएंगे और वहां बंदूक सिर्फ उनके पास होगी. इसलिए हमें आक्रामक क्षमता चाहिए और हम इस बारे में कुछ करेंगे.’’