नई दिल्ली. लैटिन अमेरिकी देश कोस्टारिका में बिहार का एक छोरा धूम मचा रहा है. बिहार के मोतिहारी के रहने वाले प्रभाकर शरण ने स्पेनिश फिल्म ‘एनरेडाडोस: ला कंफ्यूजन (इनटेंगल्ड: द कंफ्यूजन) से उभरते हुए कलाकारों की श्रेणी में अपना स्थान बनाया है. यह फिल्म कोस्टारिका में पिछले साल की लोकप्रिय फिल्मों में से एक रही है. कोस्टारिका, पनामा और मुंबई के कुछ स्थानों पर शूट की गई इस फिल्म को बॉलीवड स्टाइल में बनाया गया है.

बॉलीवुड फिल्मों की तरह ही कोस्टारिका की इस फिल्म में भी नाच-गाने हैं. कहा जा रहा है कि अमेरिका में बॉलीवुड स्टाइल में बनने वाली यह पहली फिल्म है. प्रभाकर की अभिनय प्रतिभा ही थी, जिसकी बदौलत उन्हें इस स्पेनिस फिल्म में इस लैटिन अमेरिकी देश में नई पहचान मिली. उनके साथ पूर्व वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियन और हॉलीवुड अभिनेता स्कॉट स्टेनर थे, जिन्होंने इस फिल्म में लीड रोल किया है. वहीं, कोस्टारिका की चर्चित टेलीविजन होस्ट नैंसी डोबल्स के अपोजिट प्रभाकर को भूमिका मिली थी. पिछले साल फरवरी में रिलीज हुई इस फिल्म के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स सिनेपोलिस के पास थे. कंपनी ने इसे कोस्टारिका, पनामा, निकारागुआ, होंडुरास, ग्वाटेमाला और सनसल्वाडोर में एक साथ रिलीज किया था. फिल्म ने सभी जगहों पर शानदार बॉक्स ऑफिस बिजनेस किया था.

पटना में हुआ जन्म, हरियाणा से गए कोस्टारिका
प्रभाकर शरण का जन्म बिहार की राजधानी पटना में हुआ था. उनके पिता प्रभुनाथ शरण और सुभद्रा शरण दोनों रिटायर्ड बैंकर हैं. उनकी शुरुआती शिक्षा झारखंड के भुरकुंडा और रामनगर में हुई. इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए हरियाणा के रोहतक चले आए. यहां से अपनी पढ़ाई पूरी करने कोस्टारिका पहुंचे. प्रभाकर वर्ष 2000 में कोस्टारिका पहुंचे थे. वहां उन्होंने पैन अमेरिका यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया.

 

अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान प्रभाकर शरण.
अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान प्रभाकर शरण.

आसान नहीं था प्रभाकर का शुरुआती सफर
पैन अमेरिका यूनिवर्सिटी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय कपड़ों और खान-पान का व्यवसाय शुरू किया. यह व्यवसाय कुछ साल करने के बाद 2006 में प्रभाकर ने कोस्टारिका में बॉलीवुड फिल्में दिखाने का कारोबार शुरू किया. उनके अनुसार प्रभाकर पहले व्यक्ति थे जिनकी कंपनी ने मध्य अमेरिकी देशों में बॉलीवुड फिल्मों के प्रसारण का कारोबार शुरू किया है. लेकिन यह व्यवसाय अपेक्षा के अनुरूप सफल नहीं हो सका. इसलिए वे 2010 में वापस भारत लौट आए. यहां 2013 तक उन्हें कोई काम नहीं मिला तो 2014 में उन्होंने दोबारा कोस्टारिका लौटने का फैसला किया.

दोबारा आए तो अपने शौक को ही बना लिया व्यवसाय
2014 में कोस्टारिका आने का बाद प्रभाकर शरण ने अपने अभिनय के पैशन को ही व्यवसाय बनाने का फैसला किया. उन्होंने कोस्टारिका में बॉलीवुड की तरह फिल्म बनाने का निर्णय लिया. वे बताते हैं कि इस काम में उनकी मदद वहां की शिक्षाविद टेरेसा रोड्रिग्स सेरडेस ने की. टेरेसा ने प्रभाकर को 1.5 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद का इंतजाम कराया. टेरेसा का शुक्रिया अदा करते हुए प्रभाकर कहते हैं कि टेरेसा ने ही मेरे सपने को मुकाम तक पहुंचाने में मदद की.

 

इस फिल्म ने कोस्टारिका में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस किया.
इस फिल्म ने कोस्टारिका में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस किया.

 

काम को मिला सम्मान, चहुंओर हुई तारीफ
प्रभाकर का मानना है कि सिनेमा दो संस्कृतियों को जोड़ता है. इसलिए वे कोस्टारिका में रहते हुए भी फिल्म निर्माण के व्यवसाय से जुड़े हैं. वहीं, उनकी फिल्म की तारीफ सिर्फ कोस्टारिका में ही नहीं, बल्कि कई अन्य लैटिन अमेरिकी देशों में भी हो रही है. कोस्टारिका के फिल्म कमिश्नर जोस कास्त्रो कहते हैं कि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी फिल्म ने इस देश में फिल्म निर्माण की दिशा को बदला है. वहीं, पेरू में भारतीय दूतावास में काउंसलेट रह चुके संदीप चक्रवर्ती कहते हैं कि यह फिल्म भारतीय संस्कृति और लैटिन अमेरिकी कल्चर के बीच साझेदारी का शानदार नमूना है. इसके अलावा कोस्टारिका, पनामा, निकारागुआ और ग्वाटेमाला में भारतीय विदेश सेवा से जुड़े कई अन्य अधिकारियों ने भी प्रभाकर की इस फिल्म को दोनों देशों के बीच संबंध बनाने का एक माध्यम बताया है.

फिल्म का भोजपुरी संस्करण बनाने का है सपना
सात समुंदर पार पराए देश में अपनी धाक जमाने वाले प्रभाकर शरण अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को हिंदी, अंग्रेजी और भोजपुरी में भी रिलीज करना चाहते हैं. प्रभाकर के अनुसार इस साल मार्च-अप्रैल में वे इस स्पेनिश फिल्म को ‘एक चोर, दो मस्तीखोर’ के नाम से रिलीज करना चाहते हैं. वहीं इस फिल्म को कोस्टारिका में रिलीज करने वाली कंपनी सिनेपोलिस इससे पहले फिल्म को अमेरिका में भी रिलीज करने की योजना बना रही है.