बीजिंग। चीन ने आज कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी से संबंधित पनबिजली के आंकड़े वह फिर से भारत के साथ साझा करेगा. चीन का यह फैसला दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों की दो दिन चली वार्ता के बाद आया है. गौरतलब है कि नदी में बाढ़ का पता लगाने के लिहाज से महत्वपूर्ण इन आंकड़ों को चीन ने पिछले साल भारत के साथ साझा करना बंद कर दिया था. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मानवीय भावनाओं और द्विपक्षीय संबंधों को विकसित करने की दोनों देशों की इच्छा के मद्देनजर हम पनबिजली सूचना सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे. वह पत्रकारों के सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या अब चीन ब्रह्मपुत्र में जल प्रवाह से जुड़े़ पनबिजली संबंधी आंकड़ों को भारत के साथ साझा करेगा. चीन ने पिछले साल कहा था कि तिब्बत स्थित आंकड़े एकत्र करने वाले केन्द्र में आधुनिकीकरण का काम चल रहा है इसलिए वह आंकड़े साझा नहीं कर सकता है.

चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी का पानी मोड़ने की खबर को बताया झूठा, निराधार

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हालांकि, यह घोषणा डोकलाम में भारत और चीन की सेना के बीच 73 दिन तक चले गतिरोध के बाद हुई थी. भारत के जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों ने दोनों देशों में बहने वाली नदियों पर सहयोग के संबंध में अपने चीनी समकक्षों से बातचीत की. चीन द्वारा आंकड़े मुहैया कराना बंद किये जाने के बाद यह दोनों देशों के बीच इस संबंध में पहली बैठक है. बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास की ओर से आज जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों देशों में बहने वाली नदियों के संबंध में भारत-चीन विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) की 11वीं बैठक मंगलवार को चीन के हांगझोऊ शहर में समाप्त हुई। वार्ता दो दिन चली.

भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व जल संसाधन मंत्रालय में आयुक्त के पद पर कार्यरत तीरथ सिंह मेहरा ने किया वहीं चीनी दल का नेतृत्व जल संसाधन मंत्रालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग विभाग के काउंसल यु शिंगजुंग ने किया. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में ईएलएम शुरू होने से अभी तक उसमें हुई प्रगति और पनबिजली संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने तथा दोनों देशों में बहने वाली नदियों से उत्पन्न होने वाली आपातस्थिति में सहयोग करने पर चर्चा हुई. अधिकारियों ने ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों में बाढ़ के मौसम में पनबिजली से जुड़े चीन और भारत के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया. ईएलएम की शुरुआत 2006 में हुई. इस समझौते के तहत चीन 15 मई से 15 अक्तूबर के बीच ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के आंकड़े भारत को उपलब्ध कराता है.

बता दें कि भारत-चीन अधिकारियों के बीच चल रही बातचीत के बाद चीन की तरफ से नरमी का संकेत आया है. ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर दोनों देशों के बीच अक्सर विवाद होता आया है. कभी ब्रह्मपुत्र नदी में आने वाली बाढ़ मुद्दा बनती है तो कभी इससे संबंधित पनबिजली के आंकड़े. बहरहाल, चीन ने अपने रुख में नरमी का संकेत देकर इतना जाहिर कर दिया है कि इस जैसे कई मुद्दों पर बातचीत से आगे बढ़ा जा सकता है.