कोलंबो। भारत को श्रीलंका के तेजी से उभरते बिजली क्षेत्र में, चाहे वह नवीकरणीय ऊर्जा हो या पारंपरिक ऊर्जा हो, सक्रिय रूप से भागीदारी करनी चाहिए। बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव बी. एम. एस. बाटागोडा ने दौरे पर आए भारतीय पत्रकारों से कहा, “भारत के पास अच्छा मौका है और सक्रिय रूप से भागीदारी करनी चाहिए। दोनों सरकारें व्यावसायिक क्षमता की तलाश में सक्रिय रूप से जुटी हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि द्वीपीय देश की सरकार तृपक्षीय संयुक्त उद्यम की संभावना भी तलाश रही है, जिसमें श्रीलंका, जापान और भारत शामिल होंगे। तीनों मिलकर केरावालापितिया में एलएनजी टर्मिनल का निर्माण करेंगे।

बाटागोडा ने कहा कि श्रीलंका सरकार ने सिलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) और भारत की तापीय ऊर्जा की प्रमुख कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड को प्रस्तावित 500 मेगावॉट की लिक्वीफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) बिजली संयंत्र के लिए एक वित्तीय मॉडल बनाने को कहा है।

केरावालापितिया में प्रस्तावित एलएनजी टर्मिनल के बारे में बाटागोडा ने कहा कि श्रीलंका में अब 900 मेगावॉट बिजली पैदा करने की क्षमता है, लेकिन ये महंगे ईधन से चलते हैं। इस टर्मिनल से बिजली उत्पादन के लिए सस्ते एलएनजी का प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि एक और 300 मेगावॉट की एलएनजी बिजली संयंत्र की भी निविदा जारी की जाएगी।

भारत से बिजली खरीद के बारे में पूछने पर बाटागोडा ने कहा कि एक संयुक्त समिति इसकी व्यवहार्यता को देखेगी। उन्होंने कहा कि बिजली के तार बिछाने के नए और छोटे मार्ग की तलाश की जा रही है और किसी निजी कंपनी को यह जिम्मेदारी दी जाएगी, जो इसका देख-रेख भी करेगी। यह पूछे जाने पर क्या भारत श्रीलंका से पवन ऊर्जा खरीद सकता है।

उन्होंने कहा, “हमारे पास 5,000 मेगावॉट पवन ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है। हम भारत को इसका निर्यात कर सकते हैं, वहीं हम बेस लोड जरूरतों के लिए भारत से बिजली खरीद सकते हैं।”