नई दिल्लीः जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या की घटना के बाद विदेशी मीडिया में भारत की नकारात्मक छवि पेश की गई है. जानेमाने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने घटना को धर्म के एंगल से छापा है. इन मीडिया संस्थानों ने इसे भारत के अंदर जारी धार्मिक वैमनस्य का एक और बैटलग्राउंड करार दिया है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 17 वर्षीय किशोरी के साथ रेप मामले में विधायक को आरोपी बनाने और उसको लेकर जारी राजनीति को भी प्रमुखता दी है.

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि इस घटना ने भारत में फिर से धार्मिक तनाव पैदा कर दिया है. अखबार ने लिखा है कि शुरुआत में यह यौन हिंसा की एक जघन्य घटना लग रही थी. यह एक कमजोर लड़की के खिलाफ वीभत्स घटना थी, लेकिन कुछ दिनों में यह मामला भारत में धार्मिक तनाव का मुद्दा बन गई. आरोपियों के समर्थन में हिंदू संगठनों के लोग सड़क पर उतर आए.

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धार्मिक वैमनस्य का मामला!
वाशिंगटन पोस्ट ने इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट छापी है. इसमें घटना और उसके बाद उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट है. रिपोर्टर मालवा एल्टागॉरी ने लिखा है कि कैसे इस घटना ने जम्मू क्षेत्र में दो समुदायों के बीच तनाव पैदा कर दिया. उन्होंने लिखा है कि यह घटना भारत में धार्मिक वैमनस्य का ताजा उदाहरण है. इसमें कहा गया है कि स्थिति अजीबोगरीब है. कुछ लोग पीड़ित बच्ची के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ एक दूसरा गुट बलात्कार और हत्या के आरोपियों के लिए न्याय मांग रहा है. इसी अखबार में चर्चित पत्रकार बरखा दत्त ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव और कठुआ की रेप की घटनाओं ने देश की शर्मिंदगी करा दी है. इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि कैसे ताकतवर लोग यौन शोषण के आरोपियों को बचाने में लगे हैं. इससे भी बुरा यह है कि इन्होंने दुनिया में भारत की सबसे बुरी छवि पेश की है.

निर्भया कांड से कठुआ गैंगरेप की तुलना
इसी तरह इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी द एसोसिएटेड प्रेस ने 2012 के निर्भया कांड से कठुआ गैंगरेप की तुलना की है. लेकिन कठुआ की घटना को लेकर हुए अलग तरीके के विरोध प्रदर्शन का उसने जिक्र किया है. इसमें कहा गया है कि सत्ताधारी पार्टी से संबंध रखने वाले हजारों कट्टरपंथी लोगों ने रेप और हत्या के आरोपी छह लोगों को रिहा करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. हजारों वकीलों ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए प्रदर्शन किया.

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बीबीसी ने भी बच्ची के गायब होने और उसके बाद की घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट की है. इसमें कहा गया है कि इस घटना ने स्तब्ध कर दिया है. इसने हिंदू बहुल जम्मू और मुस्लिम बहुल कश्मीर में दोनों समुदायों के बीच पैदा दूरी को एक बार फिर उजागर कर दिया है.

एशियन टाइम्स ने इस घटना को लेकर अलग एंगल निकाला है. उसने लिखा है कि इस मामले में स्थानीय अधिकारियों का रवैया ठीक नहीं है. इसमें जमीन को लेकर दोनों समुदायों के बीच चल रहे ऐतिहासिक तनाव की चर्चा की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटना के पीछे असल कहानी दोनों समुदायों के बीच जमीन का विवाद है.