नई दिल्लीः मालदीव में जारी राजनीतिक संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. सेना ने संसद में मौजूद हर सांसद को उठ कर बाहर फेंक दिया. सेना के जवाब सांसदों को कंधों पर लादे संसद परिसर से बाहर पटक आए. गौरतलब है कि मंगलवार को सेना ने संसद को चारों ओर से घेर लिया था और सांसदों को संसद में घुसने नहीं दिया था.

मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने भी सांसदों को बाहर फेंके जाने से संबंधित तस्वीरें और वीडियो ट्विटर पर पोस्ट की है. एमडीपी के महासचिव अनस अब्दुल सत्तार ने ट्वीट किया कि सेना ने सांसदों को मजलिस परिसर से बाहर फेंक दिया. चीफ जस्टिस अब्दुल्ला सईद सच सामने ला रहे थे और उन्हें भी उनके चैंबर से घसीट कर ले जाया गया. पार्टी इसकी घोर निंदा करती है.

ऐसे हुई संकट की शुरुआत

मालदीव में जारी राजनीतिक संकट की शुरुआत राष्ट्रपति अबदुल्ला यामीन और न्यायपालिका के बीच टकराव के बाद शुरू हुआ था. राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष जजों को बर्खास्त कर दिया था. इसके बाद मालदीव में विपक्षी दलों के नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया था. मालदीव को इस संकट से निकालने के लिए यूरोपियन यूनियन, जर्मनी और ब्रिटेन के प्रतिनिधी राष्ट्रपति यामीन से मिलना चाहते थे लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया था. मालदीव में पिछले हफ्ते राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया था. संयुक्त राष्ट्र हाई कमिश्नर जीद राद अल हुसैन ने इस आपातकाल को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है.मालदीव की राजधानी माले में हालात चिंताजनक बना हुआ है. विपक्षी दलों को नजरबंद किया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने नौ राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया था और कहा था उनके खिलाफ केस दुर्भावना से प्रेरित हैं. कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद, पूर्व उपराष्ट्रपति अहमद अदीब समेत 12 सांसदों को बहाल करने का आदेश दिया था. राष्ट्रपति यामीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया था और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को गिरफ्तार कर लिया था.

गौरतलब है कि मालदीव में जारी राजनीतिक संकट को लेकर भारत ने भी चिंता जाहिर की है. मालदीव की सुप्रीम कोर्ट ने भारत से मदद मांगी थी वहीं पूर्व राष्ट्रपति ने अपने देश में जारी राजनीतिक संकट खत्म करने के लिए भारत से सैन्य हस्तक्षेप की मांग की थी. इसके बाद चीन ने कहा था कि भारत को मालदीव के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.