यंगून| म्यांमार में हिंसा के कारण भाग रहे रोहिंग्या मुसलमानों के लिए आवाज उठाने में नाकामी को लेकर कड़ी आलोचना का सामना कर रहीं आंग सान सू की संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल नहीं होंगी. बीते 25 अगस्त को रोहिंग्या उग्रवादियों की ओर से किए गए हमलों के जवाब में म्यामांर की सेना ने अभियान शुरू किया जिसके बाद से करीब 379,000 रोहिंग्या बांग्लादेश की सीमा में दाखिल हो चुके हैं.

हिंसा ने सीमा के दोनों तरफ गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है. सू की पर यह वैश्विक दबाव बना है कि वह सेना के अभियान की निंदा करें. संयुक्त राष्ट्र ने इस अभियान को नस्ली संहार करार दिया है.

म्यामांर की सरकार के प्रवक्ता जॉ ह्ते ने कहा कि स्टेट काउंसलर सू की संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल नहीं होंगी. प्रवक्ता ने फैसले के पीछे की वजह नहीं बताई लेकिन उन्होंने कहा कि देश के उप राष्ट्रपति हेनरी वान थियो सम्मेलन में शामिल होंगे जो अगले सप्ताह आयोजित होगा.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख जैद राद अल हुसैन ने म्यामांर पर रोहिंग्या नागरिकों पर व्यवस्थित हमले शुरू करने का आरोप लगाया था जिसके बाद यह घोषणा की गई है. इस संकट पर चर्चा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बुधवार को एक बैठक करने की भी योजना है.

म्यामांर की पूर्व सरकार के तहत लोकतंत्र स्थापित करने की सक्रियता के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सू की किसी समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंखों का तारा थीं लेकिन रोहिंग्या मुस्लिमों के मुद्दे पर चुप्पी को लेकर कई नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने उनकी आलोचना की है.