नई दिल्ली. अपने भारत दौरे से एक दिन पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत और चीन के साथ समान व्यवहार करने की बात कही थी. यह भारत की कूटनीति के लिहाज से चिंताजनक बात थी. लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय मानता है कि वह नेपाली प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच की स्थिति को सुधार लेगा. हालांकि नेपाल के पीएम ने भारत आने के बाद मीडिया से बातचीत में भी अपने पूर्व के बयान पर खुद को कायम रखा है. समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए उन्होंने आज कहा कि उनका देश अपने दोनों पड़ोसियों, भारत और चीन, से दोस्ती बनाए रखेगा. ओली ने चीन के ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबोर) प्रोजेक्ट को लेकर कहा, ‘नेपाल, भारत और चीन दोनों से अपनी दोस्ती बनाए रखेगा. भौगोलिक रूप से नेपाल इन दोनों देशों के बीच है, इसलिए मुझे लगता है कि हम तटस्थ हैं. दोनों पड़ोसियों के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं. ये दोनों देश क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से नेपाल से बहुत बड़े हैं. इसलिए हम दोनों से अपनी दोस्ती के अवसर भुनाते रहेंगे.’ पीएम बनने के बाद पहली बार भारत का दौरा करने को लेकर पूछे गए सवाल पर ओली ने कहा, ‘भारत ने मुझे आमंत्रण दिया था, मैं इसलिए यहां आया हूं.’

ओली के दौरे से नेपाल-भारत के बीच दूरी मिटाने की कवायद
दरअसल आठ महीने पहले नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के साथ शीर्षस्तरीय वार्ता हुई थी. इसमें देउबा ने कहा था कि वह द्विपक्षीय रिश्ते में तनाव का कारण बनने वाली हर बाधा को दूर कर देंगे. लेकिन नेपाल में पिछले साल के दिसंबर में हुए चुनावों में वाम दलों के गठबंधन को जीत मिली, इसके बाद से ही नेपाल में भारत के प्रति नजरिये में बदलाव आ गया. गौरतलब है कि नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री केपी ओली को भारत के प्रति तल्ख रवैये वाला माना जाता है. इस बार भी जब नेपाल में नई सरकार बनी तो भारत के इस पड़ोसी देश ने पाकिस्तान के पीएम को अपने यहां न्योता देकर बुलाया. इससे भारत की चिंताएं और बढ़ गईं. अब जबकि केपी ओली खुद भारत दौरे पर आए हैं, तो भारत की कोशिश है कि दोनों देशों के संबंधों को फिर पुराने दिनों में ले जाया जाए. इसलिए इस दौरे में भारत सरकार ने नेपाल में चल रही अपनी सभी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की प्रतिबद्धता दिखाई है. ओली द्वारा भी यह मुद्दा उठाने की बात कही जा रही है. क्योंकि बीते दिनों उन्होंने नेपाल में वर्ष 1981 में भारत द्वारा शुरू किए गए पंचेश्वर बांध परियोजना की याद दिलाई थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली का स्वागत किया. (फोटोः पीआईबी)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली का स्वागत किया. (फोटोः पीआईबी)

चीन के प्रोजेक्ट का समर्थन भारत के लिए चिंता
भारत और नेपाल, दोनों के पड़ोसी देश चीन ने अपने ‘ओबोर’ प्रोजेक्ट के तहत नेपाल में बड़े पैमाने पर निवेश की घोषणाएं की हैं. चीन तिब्बत को सड़क और रेलवे नेटवर्क से नेपाल की राजधानी काठमांडु से जोड़ना चाहता है. इसमें नेपाल ने जिस तरह से चीन का साथ देने के प्रति उत्साह दिखाया है, उससे भारत की चिंताएं बढ़ी हैं. इसी के मद्देनजर पीएम नरेंद्र मोदी और नेपाली पीएम ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को दोहराया कि नेपाल और भारत एक-दूसरे के करीबी हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा भी कि नेपाल की राजधानी काठमांडु से सीधे भारत को जोड़ने वाले रेल नेटवर्क के विस्तार के प्रति दोनों देश आशान्वित हैं. पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत नेपाल में जलमार्ग और रेलमार्ग के विस्तार के प्रति गंभीर है. नेपाल मामले को जानने वाले विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की ये बातें दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूती देगी. नेपाल के प्रति इसी कूटनीति का हिस्सा है कि ओली के इस दौरे पर भारत और नेपाल के बीच हैदराबाद हाउस में शीर्षस्तरीय वार्ता में आठ महत्वपूर्ण समझौते किए गए.

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भारत में कई मंत्रियों से मिलेंगे केपी शर्मा ओली
तीन दिवसीय दौरे पर भारत आए केपी शर्मा ओली अपनी यात्रा के दौरान भारत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत कई मंत्रियों से मिलेंगे. उनके साथ नेपाल सरकार के कई मंत्री, सांसद और उच्च अधिकारियों का दल भी आया है. साथ ही उनकी पत्नी राधिका शाक्य भी आई हैं. आज सुबह ओली ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की. इसके बाद वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले. उनका विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिलने का कार्यक्रम है. वहीं प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रपति भवन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मौजूदगी में विदेश नीति पर वार्ता होनी है. इसके अलावा नेपाली प्रधानमंत्री उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू से भी मिलेंगे.