इस्‍लामाबाद: पकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राजदूत हुसैन हक्‍कानी की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने ये आदेश 2011 में मेमोगेट स्‍कैंडल के मामले को लेकर जारी किया है. इस विवाद के सामने आने के बाद हक्‍कानी को अपना पद छोड़ना पड़ा था. अमेरिका में राजदूत रहे हक्‍कानी अभी वहीं रह रहे हैं. वहीं, हक्‍कानी ने कोर्ट के कदम पर सवाल उठाया है.

इस मामले में पाकिस्‍तान के अतिरिक्‍त महाधिवक्‍ता वकार राना ने हक्‍कानी को पाकिस्‍तान वापस लाने के लिए कोर्ट में एक रिपोर्ट सब्‍मिट की है. वहीं, हक्‍कानी ने सुप्रीम कोर्ट के गिरफ्तारी आदेश पर ट्वीट किया है. इसमें उन्‍होंने लिखा, शुभचिंतकों से सुप्रीम कोर्ट की गंभीरता के बारे में वारंट जारी करने पर पूछना चाहता हूं. यहां पहले भी कुछ ऐसी कहानियां रही हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे ऐसी कोशिशें नाकाम हो गईं.

 

मोमोगेट विवाद को लेकर खुलासा का दावा करने वाले पाकिस्‍तानी मूल के अमेरिकी कारोबारी मंसूर एजाज ने कोर्ट में गवाही के दौरान कहा था कि उसने हक्‍कानी के कहने पर ही यह ज्ञापन तैयार किया था. इसमें पाकिस्‍तान की तत्‍कालीन जरदारी सरकार के तख्‍ता पलट के डर से अमेरिका से सैन्‍य सहायता की मांग की गई थी. बता दें कि हक्‍कानी 2008 से 2011 से अमेरिका में पाकिस्‍तानी दूतावास में राजदूत थे. मेमोगेट में तथाकथित आरोप लगने के बाद उन्‍हें अपने पद से इस्‍तीफा देना पड़ा था.

क्‍या है मेमोगेट स्‍कैंडल
मंसूर एजाज ने दावा किया था कि ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद हक्‍कानी ने उससे एक मेमो तैयार करवाया था. इसमें पाकिस्‍तानी सरकार ने सैन्‍य तख्‍तापलट की आशंका के चलते अमेरिकी सरकार से मदद मांगने की बात कही गई थी. एजाज ने दावा किया था कि हक्‍कानी के कहने पर ही उसने इस गोपनीय मेमो को पूर्व राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जिम जोन्‍स तक पहुंचाया था.  (इनपुुुट- एएनआई)