इस्लामाबाद। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए पाकिस्तान ने अपने आतंक रोधी कानून में चुपचाप संशोधन कर दिया जिससे कि हाफिज सईद से जुड़े जमात उद दावा और फलाह ए इंसानियत फांउडेशन और अन्य आतंकी समूहों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित किए गए समूहों की सूची में डाला जा सके. डॉन अखबार के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन द्वारा लागू किए गए नए अध्यादेश का एक बड़ा असर यह होगा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल अल अख्तर ट्रस्ट और अल राशिद ट्रस्ट के साथ ही सईद से जुड़े जमात उद दावा और फलाह ए इंसानियत फांउडेशन भी प्रतिबंधित हो जाएंगे.

मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज

साल 2008 में हुए मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड हाफिज सईद जमात उद दावा का प्रमुख है जो आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का मुखौटा माना जाता है. रिपोर्ट में कहा गया कि आतंक रोधी कानून 1997 में संशोधन ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध सूची और आतंकी समूहों तथा लोगों को प्रतिबंधित करने की राष्ट्रीय सूची के बीच पुराना अंतर खत्म हो गया है. पाकिस्तान का यह कदम पेरिस में 18 से 23 फरवरी तक होने वाली वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की बैठक से पहले आया है.

अखबार ने कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय धनशोधन और आतंकी वित्त पोषण निगरानी संबंधी ‘ग्रे लिस्ट’ में डलवाने के लिए अमेरिका और भारत मुहिम चलाए हुए हैं. अखबार ने कहा कि पाकिस्तान को पिछली बार फरवरी 2012 में एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ में डाला गया था और यह इस सूची में तीन साल तक रहा था. पिछले सप्ताह पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) ने संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया था कि वे कुछ उल्लेखनीय कार्रवाई जल्द से जल्द करें.

पाकिस्तान को सौंपनी है रिपोर्ट

पाकिस्तान के शीर्ष असैन्य-सैन्य समन्वय फोरम ने एफएटीएफ की आगामी पूर्ण बैठक के मद्देनजर एफएटीएफ की जरूरतों के पालन के लिए संघीय और प्रांतीय सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की थी. एफएटीएफ की बैठक में जमात उद दावा के सरगना सईद और उससे जुड़े संगठनों का वित्तपोषण रोकेने के लिए उठाए गए कदमों पर पाकिस्तान द्वारा रिपोर्ट सौंपी जाएगी. अंतर सरकारी इकाई ने पिछले साल नंवबर में ब्यूनस आयर्स में हुई अपनी पूर्ण बैठक में पाकिस्तान से कहा था कि वह लश्कर ए तैयबा और जमात उद दावा के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट पेरिस बैठक में पेश करे.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में अलकायदा, तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान, लश्कर ए झांग्वी, जमात उद दावा, फलाह ए इंसानियत फाउंडेशन, लश्कर ए तैयबा और अन्य संगठन शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम ने अनुपालन की समीक्षा करने के लिए जनवरी में पाकिस्तान का दौरा किया था, लेकिन विश्लेषकों को आशंका है कि देश के लिए एफएटीएफ की समीक्षा कठोर हो सकती है.

उठाए जा सकते हैं सख्त कदम

इसमें कहा गया कि ऐसी आशंका है कि अंतरराष्ट्रीय इकाई पाकिस्तान के खिलाफ कुछ दंडात्मक कदम उठा सकती है. धनशोधन औरआतंकी वित्तपोषण के खिलाफ समुचित कार्रवाई न करने वाले देशों को एफएटीएफ की ‘ग्रे’ और ‘ब्लैक’ लिस्ट में डाल दिया जाता है. जरूरी मानकों पर खरा न उतरने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की शक्ति निगरानी इकाई के पास नहीं है. हालांकि इस तरह की सूची संबंधित देश से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को प्रभावित कर सकती है क्योंकि ऐसे में वे व्यापक निगरानी के दायरे में आ जाएंगे. इससे अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की लागत में इजाफा हो सकता है और अंतत: स्थानीय स्तर पर कामकाज करना काफी महंगा हो सकता है.