नई दिल्ली| पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत कथित भारतीय जासूस कुलभूषण जाधव को दी गई मौत की सजा को अमान्य नहीं ठहरा सकता. अजीज ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जाधव ने पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की बात कबूली है और वह भारतीय नौसेना का अधिकारी था जो फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर रहा था. देश के कानून के आधार पर उसे सजा दी गई है.

अजीज ने संवाददाताओं से कहा कि आईसीजे ने सिर्फ पाकिस्तान से यह कहा है कि उसके किसी फैसले तक पहुंचने तक जाधव की फांसी ना दी जाए. उन्होंने कहा कि जब मौत की सजा वाले मामले आते हैं तो अंतरराष्ट्रीय अदालत ने हमेशा स्थगन आदेश दिया है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आईसीजे कुलभूषण की सजा को खत्म नहीं कर सकता और इस मामले पर फैसला पाकिस्तान के कानून के अनुसार लिया जाएगा.

अजीज ने कहा कि आईसीजे ने राजनयिक मदद पर कोई फैसला नहीं किया और यह कहा है कि मामले पर चर्चा होगी और कहा कि भारत की यह धारणा कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत के फैसले में पाकिस्तान की हार हुई है, सही नहीं है. उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया ने एक गलत धारणा बनाई है कि पाकिस्तान मुकदमा हार गया है.

एक सवाल के जवाब में कि आईसीजे में सुनवाई के दिन किसी न्यायाधीश को क्यों नहीं भेजा गया, उन्होंने कहा कि सरकार पांच दिनों की अल्पावधि में किसी वकील को नामित नहीं कर सकी. अजीज ने कहा कि अगली सुनवाई में हम वकीलों की मजबूत टीम के साथ जाएंगे.

उन्होंने कहा कि जाधव केवल भारतीय नागरिक ही नहीं, बल्कि वह भारतीय नौसेना का अधिकारी भी है, जिसने पाकिस्तान में जासूसी गतिविधियों में लिप्त होने की बात कबूल की और इस संदर्भ में पाकिस्तान का पक्ष ‘बेहद मजबूत’ है.

गौरतलब है कि संयक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत ने हाल में भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान को अंतिम फैसला आने तक जाधव को फांसी नहीं देने का आदेश दिया है.

पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कथित तौर पर जासूसी तथा आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता को लेकर जाधव को मौत की सजा सुनाई है. पाकिस्तान ने जाधव को मार्च 2016 में बलूचिस्तान में गिरफ्तार करने का दावा किया है, जबकि भारत का कहना है कि उसे ईरान से अगवा किया गया था.
(आईएनएस से इनपुट)