वाशिंगटनः आतंकवादी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान की नकेल कसने की कार्रवाई शुरू कर दी है. उसने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में एक प्रस्ताव पेश किया है जिससे कि आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता देने के लिए पाकिस्तान पर नजर रखी जाएगी. FATF की अगले सप्ताह पेरिस में बैठक होने वाली है. उससे पहले ही अमेरिका ने यह प्रस्ताव पेश किया है. FATF एक अंतरराष्ट्रीय अंतर सरकारी बॉडी है जो मनी लाउंड्रिंग और आतंकवाद को धन देने पर नजर रखता है. हमारे सहयोगी चैनल विऑन न्यूज के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी अमेरिका के इस कदम की पुष्टि की है.

जानकारों ने बताया है कि 2012 से 2015 के बीच FATF की वॉचलिस्ट में था. इस वॉचलिस्ट में पाकिस्तान को डाले जाने से उसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और वहां से निवेशक बाहर निकलेंगे. इतना ही नहीं इस लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल किए जाने उसके लिए कर्ज लेना मुश्किल हो जाएगा. इससे पाकिस्तान की सरकार पर आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए मजबूर किया जा सकेगा. FATF ने पहले ही इसकी चेतावदी दी थी कि वह उसे निगरानी सूची में डाल देगा. पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेताया था कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीदर नॉअर्ट ने कहा कि अमेरिका हमेशा से पाकिस्तान में एंटी मनी लाउंड्रिंग या काउंटर टेरोरिज्म फाइनेंश को लेकर गड़बड़ियों पर चिंता जताता रहा है.

पाकिस्तान को हो गया था आभास
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए पाकिस्तान ने अपने आतंक रोधी कानून में चुपचाप संशोधन कर दिया है जिससे कि हाफिज सईद से जुड़े जमात उद दावा और फलाह ए इंसानियत फांउडेशन और अन्य आतंकी समूहों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित किए गए समूहों की सूची में डाला जा सके. डॉन अखबार के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन द्वारा लागू किए गए नए अध्यादेश का एक बड़ा असर यह होगा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल अल अख्तर ट्रस्ट और अल राशिद ट्रस्ट के साथ ही सईद से जुड़े जमात उद दावा और फलाह ए इंसानियत फांउडेशन भी प्रतिबंधित हो जाएंगे.

साल 2008 में हुए मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड हाफिज सईद जमात उद दावा का प्रमुख है जो आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का मुखौटा माना जाता है. रिपोर्ट में कहा गया कि आतंक रोधी कानून 1997 में संशोधन ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध सूची और आतंकी समूहों तथा लोगों को प्रतिबंधित करने की राष्ट्रीय सूची के बीच पुराना अंतर खत्म हो गया है. पाकिस्तान का यह कदम पेरिस में 18 से 23 फरवरी तक होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक से पहले आया है. अखबार ने कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय धनशोधन और आतंकी वित्त पोषण निगरानी संबंधी ‘ग्रे लिस्ट’ में डलवाने के लिए अमेरिका और भारत मुहिम चलाए हुए हैं. अखबार ने कहा कि पाकिस्तान को पिछली बार फरवरी 2012 में FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ में डाला गया था और यह इस सूची में तीन साल तक रहा था. पिछले सप्ताह पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) ने संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया था कि वे कुछ उल्लेखनीय कार्रवाई जल्द से जल्द करें.