इस्लामाबाद। अमेरिका गुपचुप तरीके से भारत और पाकिस्तान पर फिर से संवाद शुरू करने के लिए दबाव डाल रहा है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इन परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसियों के बीच तनाव कम करना चाहता है. पाकिस्तानी मीडिया में आई एक रिपोर्ट में आज यह जानकारी दी गई है. दोनों दक्षिण एशियाई प्रतिद्वंद्वियों के बीच रिश्ते सामान्य करने का अमेरिका का मकसद अफगानिस्तान मामले पर ज्यादा केंद्रित रुख अपनाने की इसकी कोशिशों का हिस्सा है.

टिलरसन का दौरा

‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने सरकारी अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन हाल में जब भारत और पाकिस्तान के दौरे पर थे, उस वक्त दोनों देशों के नेतृत्व के समक्ष यह मुद्दा उठाया था. अखबार ने कहा कि टिलरसन के दौरे के बाद से लगता है कि पर्दे के पीछे चल रही कोशिशें कामयाब होनी शुरू हो गई हैं, क्योंकि विवादित कश्मीर क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के पास हाल के दिनों में हिंसा में अच्छी-खासी कमी आई है. भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच दोनों देशों की सीमा पर पिछले दो-तीन साल से खूनी झड़पें होती रही हैं. संघर्ष-विराम उल्लंघनों और आम लोगों को हुए नुकसान के मामले में मौजूदा साल बदतर रहा है. 

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तनाव कम करना चाह रहा ट्रंप प्रशासन

पर्दे के पीछे चल रही कवायद से वाकिफ अधिकारियों ने अखबार से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि ट्रंप प्रशासन दोनों देशों के बीच तनाव कम करना चाह रहा है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि टिलरसन ने पाकिस्तान को बताया था कि ट्रंप प्रशासन इस्लामाबाद और नई दिल्ली के बीच सुलह कराना चाहता है.

पाकिस्तान में दोषी करार दिए गए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से उसकी पत्नी को मिलने देने के चौंकाने वाले फैसले के पीछे भी अमेरिकी कोशिश मानी जा रही है. बहरहाल, पाकिस्तान ने सार्वजनिक तौर पर जोर देकर कहा है कि यह पेशकश पूरी तरह मानवीय आधारों पर की गई.

भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी जाधव को जासूसी और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहने के कथित जुर्म में फील्ड कोर्ट मार्शल ने मौत की सजा सुनाई थी.
हालांकि, कोई अधिकारी यह स्वीकार नहीं कर रहा कि जाधव पर फैसले और नियंत्रण रेखा पर झड़पों में आई कमी के तार अमेरिकी प्रयासों से जुड़े हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसा कोई निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया के लिए कोई ऐसा खाका पेश करने में अब भी संघर्ष कर रहा है जिससे समस्या का समाधान निकल सके. बहरहाल, अधिकारी ने साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव कायम रहने से अमेरिका की कोशिशें निश्चित तौर पर कमजोर पड़ेंगी.