वाशिंगटन| रणनीतिक चाबहार बंदरगाह के खुलने के बाद पारगमन व्यापार के लिए अफगानिस्तान को पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहना होगा. अफगानिस्तान के एक शीर्ष नेता ने यह बात कही. ऊर्जा संपन्न फारस की खाड़ी के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चाबहार बंदरगाह फारस की खाड़ी के बाहर स्थित है और यहां भारत के पश्चिमी से पाकिस्तान जाए बिना आसानी से पहुंचा जा सकता है.

भारत एक वैकल्पिक और विश्वसनीय पहुंच मार्ग बनाने के लिए अफगानिस्तान के साथ नजदीकी से काम कर रहा है. इसमें पाकिस्तान से गुजरने की जरूरत नहीं होगी. अफगानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने कहा कि अफगानिस्तान अब तक कराची के रास्ते एक पारगमन सड़क पर निर्भर रहा है. अब यह स्थिति नहीं रहेगी. अब चाबहार के रास्ते जा सकेंगे.
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भारत और ईरान के बीच पिछले साल मई में किए गए करार के अनुसार भारत चाबहार बंदरगाह के चरण-एक में 8.52 करोड़ डालर के पूंजी निवेश तथा दस साल के पट्टे पर सालाना 2.29 करोड़ डॉलर के राजस्व खर्च से दो बर्थों का परिचालन करेगा. निकट भविष्य में अफगानिस्तान के पास मध्य एशिया के जरिये भी व्यापार पारगमन मार्ग होगा जो उसे यूरोप के साथ जोड़ेगा.