Ramayana Katha: जब भगवान श्री राम पर लगा था ब्रह्म हत्या का दोष, जानिए इससे जुड़ी कथा और उपाय

रामायण कथा में इस छंद का भी उल्लेख है कि जब भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था तब उन पर ब्रह्म हत्या का दोष लग गया था. आइए जानते हैं, इससे जुड़ी कथा और उपाय.

Written by: Shantanoo Mishra Edited by: Shantanoo Mishra
Published: October 22, 2023, 5:17 PM IST

Ramayana Katha in Hindi: मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम के जीवन पर आधारित रामायण कथा से अधिकांश लोग परिचित होंगे. इसमें भगवान श्री राम के चरित्र, बालयावस्था, युवावस्था, जानकी जी से विवाह, वन गमन, सीता हरण और रावण वध का उल्लेख विस्तार से किया गया है. इसके साथ रामायण में यह भी बताया गया है कि भगवान श्री राम भगवान विष्णु के रूप हैं और वह अधर्म पर धर्म की पुनर्स्थापना के लिए धरती पर अवतरित हुए थे.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्री राम पर एक बड़ा दोष लग गया था. वह था ब्रह्म हत्या का दोष. बता दें कि ब्रह्म हत्या का अर्थ होता है उस व्यक्ति की हत्या, जिसे ‘ब्रह्मा का ज्ञान है’. शास्त्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति पर ब्रह्म हत्या का दोष होता है, उसके समूचे कुल का नाश हो जाता है. आइए जानते हैं, कैसे भगवान श्री राम पर लगा ब्रह्म हत्या दोष और किस प्रकार उन्होंने किया इस दोष का निवारण?

जब श्री राम पर लगा ब्रह्म हत्या का दोष

रामायण कथा में यह विदित है कि लंकापति रावण ब्राह्मण कुल से संबंध रखता था और वह प्रकांड पंडित भी था. वह सभी वेद, उपवेद और ज्योतिष इत्यादि विषयों का सर्वज्ञता था. जब भगवान श्री राम और रावण के बीच में युद्ध हुआ, तब श्री राम ने रावण का वध कर धर्म पर धर्म की पुनर्स्थापना की. लेकिन रावण का वध करने कारण श्री राम पर ब्रह्म हत्या का दोष लग गया. जब श्री राम लंका पर विजय प्राप्त कर प्रयागराज पहुंचे तो उन्होंने महर्षि भारद्वाज से भेंट करने की इच्छा प्रकट की, लेकिन उनपर ब्रह्म हत्या का दोष होने के कारण महर्षि भारद्वाज ने उनसे मिलने के लिए मना कर दिया.

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भगवान श्री राम ने इस दोष से मुक्ति के लिए गुरु वशिष्ठ से जब उपाय पूछा तो उन्होंने बताया कि वह गोमती के पावन जल में डुबकी लगाएं. तब श्री राम ने ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन गोमती नदी में डुबकी लगाई और वह ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्त हो गए. इसके साथ एक कथा यह भी है कि जब भगवान श्री राम लंका पर विजय प्राप्त कर वापस लौट रहे थे, तब उन्होंने रामेश्वरम में अपने हाथों से शिवलिंग का निर्माण किया था और भगवान शिव की उपासना की थी. जिससे उनपर लगा ब्रह्म हत्या समाप्त हो गया था. बता दें श्रीराम पर ब्रह्म हत्या का दोष लगा था या नहीं इस विषय पर कई धर्माचार्यों में मतभेद हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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