Auto Sales: देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में मिल रहे सुधार (Improvement) के संकेतों में एक और कड़ी जुड़ गई है. अब यात्री वाहन बिक्री (Passenger car sales) में भी धीरे-धीरे तेजी दिखने लगी है. दिसंबर, 2020 में यात्री वाहनों की बिक्री 13.59 फीसदी बढ़कर 2,52,998 इकाई पर पहुंच गई. इसके पहले दिसंबर, 2019 में कुल 2,22,728 यात्री वाहन बिके थे.Also Read - 'तीसरी लहर के बावजूद मजबूत हुई भारत की समग्र आर्थिक गतिविधि'

सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIYAM) द्वारा गुरुवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, आलोच्य महीने में कुल 11,27,917 दोपहिया वाहन बिके. यह आंकड़ा इससे पिछले साल दिसंबर में बिके 10,50,038 दोपहिया वाहनों के मुकाबले 7.42 फीसदी ज्यादा है. इस दौरान मोटरसाइकिल की बिक्री 6.65 फीसदी बढ़कर 7,44,237 इकाई, स्कूटर बिक्री 5.59 फीसदी बढ़कर 3,23,696 इकाई रही. Also Read - Indian Economy: वित्त वर्ष 2021-22 में 9.5% से ज्यादा तेजी से बढ़ सकती है भारत की अर्तव्यवस्था: एसबीआई रिपोर्ट

सियाम के महानिदेशक (Director General of SIYAM) राजेश मेनन (Rajesh Menon) ने बताया कि दिसंबर, 2019 में वाहनों की बिक्री बहुत कम रही थी. इस लिहाज से दिसंबर, 2020 यात्री और दोपहिया वाहनों की बिक्री के लिए बेहतर रहा. उधर, जनवरी-दिसंबर, 2020 के दौरान देश से वाहनों का निर्यात 18.87 फीसदी कम होकर 38,65,138 इकाई रह गया. Also Read - GDP Growth Rate: देश की GDP वृद्धि दर जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.4 प्रतिशत रही

आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की अक्तूबर-दिसंबर यानी तीसरी तिमाही में विभिन्न श्रेणी के वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 10.61 फीसदी बढ़कर 59,44,991 इकाई पर पहुंच गई. यात्री वाहनों की बिक्री 14.44 फीसदी बढ़कर 8,97,908 इकाई रही. इस दौरान 13.37 फीसदी वृद्धि के साथ कुल 47,82,110 दोपहिया वाहन बिके. हालांकि, वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 1.12 फीसदी घटकर 1,93,034 इकाई रही.

सियाम के अध्यक्ष (President of SIYAM) केनिचि आयुकावा ने कहा कि तीसरी तिमाही में यात्री और दोपहिया वाहन श्रेणी में कुछ सुधार दिखा है. हालांकि, वाणिज्यिक और तिपहिया वाहनों की बिक्री में अब भी गिरावट जारी है. उन्होंने कहा, उद्योग सेमीकंडक्टर, स्टील और शिपिंग कंटेनर की कमी से जूझ रहा है. स्टील, लॉजिस्टिक और अन्य कच्चे माल की बढ़ती कीमतें भी असर डाल रही हैं.

हालांकि, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना की घोषणा, कम ब्याज दर (Low Interest Rates), ग्रामीण इलाकों में खर्च बढ़ाने का लक्ष्य और सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर (Road Infrastructure) के निर्माण पर जोर देने जैसी पहल से उद्योग को उबरने में मदद मिलेगी.