करवार, कर्नाटक. बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने एक कार्यक्रम से प्रकाश राज के जाते ही मंच की धुलाई गौमूत्र से कर डाली. ऐसा कथित तौर पर मंच के शुद्धिकरण के लिए किया गया. बता दें कि दक्षिण भारत की फिल्मों के साथ साथ बॉलीवुड में भी बड़ा नाम बन चुके प्रकाश राज ने कई मौकों पर संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल खड़े किए हैं. प्रकाश राज बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी मुखर रहे हैं. Also Read - सुशांत के सुसाइड पर प्रकाश राज का बयान, बोले-नेपोटिज्म ने इस टैलेंटेड एक्टर को मार डाला  

बीजेपी के आलोचक रहे अभिनेता प्रकाश राज ने गुजरात चुनावों में भगवा पार्टी की जीत पर उसकी तारीफ की थी, लेकिन साथ ही पूछा था कि पार्टी 150 से ज्यादा सीट लाने के अपने लक्ष्य को हासिल क्यों नहीं कर पाई. राज ने एक ट्वीट कर बीजेपी की जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी, लेकिन उन्होंने कहा, ‘क्या आपको अपने विकास के साथ सूपड़ा साफ नहीं करना चाहिए था? 150 प्लस का क्या हुआ?’. उन्होंने कहा कि क्या मोदी एक पल रुककर यह सोचेंगे कि ‘विभाजनकारी राजनीति’ काम नहीं आई. Also Read - Birthday Special: उथल-पुथल से भरपूर रही प्रकाश राज की जिंदगी, बेटे की मौत के बाद बिखर गई थी जिंदगी

कुछ हफ्ते पहले अभिनेता-फिल्म निर्माता प्रकाश राज ने ‘हिंदू चरमवाद’ पर अभिनेता कमल हासन के विचारों का समर्थन किया था. प्रकाश राज ने ट्वीट किया था कि धर्म, संस्कृति और नैतिकता के नाम पर डर पैदा करना आतंकित करना नहीं है तो और क्या है. मैं बस पूछ रहा हूं. Also Read - बीजेपी विधायक ने कोरोनावायरस से निपटने का दिया मंत्र, कहा- गोमूत्र, गोबर का इस्तेमाल से किया जा सकता है इलाज

इसके साथ ही प्रकाश राज ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘यदि नैतिकता के नाम पर मेरे देश की सड़कों पर युवा जोड़ों को मारना आतंकित करना नहीं है..अगर कानून को हाथों में लेना और गाय को मारने के थोड़े से संदेह पर लोगों को मारना आतंकित करना नहीं हैं..यदि असंतोष की छोटी आवाज को चुप करने के लिए दुर्व्यवहार करना और धमकी देना आतंकित करना नहीं है..तो आतंकित करना क्या है..बस पूछ रहा हूं.’

प्रकाश राज का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कमल ने एक तमिल पत्रिका में लिखा था कि इससे पहले दक्षिणपंथी हिंदू बहस करते थे, हिंसा में शामिल नहीं होते थे. लेकिन जब उनकी ‘चालाकी’ विफल होने लगी तो वे अब हिंसा का सहारा ले रहे हैं. कमल हासन ने कहा, ‘चरमवाद उनके खेमे में भी फैल गया है. यह चरमवाद खुद को हिंदू कहलाने वालों की जीत या प्रगति नहीं है.’