पटना: बिहार के पटना जिले के मोकामा स्थित एक बालिका आवासगृह से सात लड़कियां फरार हो गई. फरार होने वाली लड़कियों में चार मुजफ्फरपुर बालिका आवासगृह की बताई जा रही हैं. बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि मोकामा स्थित स्वयंसेवी संस्था-नाजरथ सोसाइटी द्वारा मोकामा में चलाए जा रहे बालिका आवासगृह से सात लड़कियां फरार हो गई हैं. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आवासगृह संचालक के मुताबिक लड़कियां आवासगृह के बाथरूम का ग्रिल काटकर भागी हैं. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने आवासगृह पहुंचकर मामले की जांच प्रारंभ कर दी है. पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि ने कहा, ‘इस मामले की प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है तथा जांच प्रारंभ कर दी गई है. एसएफएल की टीम भी आवासगृह पहुंचकर जांच कर रही है. आसपास के थानों और रेल पुलिस बल को अलर्ट कर दिया गया है.’

इस बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस घटना के बाद बिहार सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘मुजफ्फरपुर आवासगृह की गवाह बच्चियों को भी गायब किया गया. सत्ता शीर्ष पर बैठे किस शख्श को बचाने की साजिश हो रही है? पीड़ित बच्चियां अभी भी क्यों सुरक्षित नहीं है? सर्वोच्च न्यायानय की मनिटरिंग के बावजूद ये दु:साहस कौन कर रहा है? मुख्यमंत्री को किस बात का डर है?’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “मुख्यमंत्री समेत पूरे तंत्र को बचाने के लिए मुजफ्फरपुर दुष्कर्म कांड की 5 गवाह लड़कियां मोकामा आवासगृह से गायब की गई. भगवान इन अनाथ बच्चियों को दरिंदों से बचाए. काले पाप से किए काले मुंह को बचाने के लिए सत्ताधारियों को क्या-क्या नहीं करना पड़ रहा है?” उल्लेखनीय है कि बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका आवासगृह में लड़कियों के यौन शोषण का मामला प्रकाश में आने के बाद मुजफ्फरपुर बालिका आवासगृह की लड़कियों को राज्य के अन्य बालिका आवासगृहों में स्थानांतरित कर दिया गया था.

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गौरतलब है कि सरकार द्वारा मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट अफ सोशल साइंसेज द्वारा किए गए सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर स्थित बालिका आवास गृह में लड़कियों के यौन शोषण का मामला जून 2018 में सामने आया था. इस मामले के प्रकाश में आने के बाद राज्य का सियासी पारा चढ़ गया था. विपक्षियों के दबाव के बाद 26 जुलाई, 2018 को राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया था. पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले को मुजफ्फरपुर अदालत से दिल्ली की एक अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है.