नई दिल्ली. इंटरमीडिएट की परीक्षा में टॉपर घोटाला, बी.एड घोटाला, निजी विश्वविद्यालयों के फर्जी डिग्री घोटालों के बाद बिहार सरकार बी.एड की फर्जी डिग्री को लेकर गंभीर हुई है. बिहार में बी.एड की पढ़ाई को लेकर राज्य सरकार अगले कुछ महीनों में कई कदम उठाने जा रही है. बी.एड कॉलेजों में प्रवेश, पढ़ाई और परीक्षा में सुधार के लिए सरकार सकारात्मक पहल करने के मूड में है. दरअसल, प्रदेश में फर्जी तरीके से बी.एड की पढ़ाई करने और इसकी डिग्री लेने की घटनाएं आए दिन सुनने को मिलती हैं.

राज्य सरकार ने कई बार इस पर लगाम लगाने की कोशिश की, लेकिन फर्जी डिग्री बांटने वाले रैकेट पर रोक नहीं लग सकी. लिहाजा, अब बिहार सरकार बी.एड की फर्जी डिग्री पर अंकुश लगाने के लिए एकीकृत परीक्षा प्रणाली अपनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कल ही इससे संबंधित घोषणा की थी. इसमें उन्होंने कहा था कि बिहार में भी अब नेशनल एलिजिबिलिटी एंड इंट्रेंस टेस्ट (नीट) की तर्ज पर बी.एड की प्रवेश परीक्षा होगी.

 

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फर्जी डिग्री बांटने वालों पर लगेगी लगाम
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने बयान में कहा था कि बिहार में फर्जी तरीके से बी.एड की परीक्षा लेने और डिग्री देने के रैकेट चलाए जा रहे हैं. लोग फर्जी तरीके से बी.एड कॉलेज में एडमिशन लेते हैं और कई बार परीक्षा दिए बिना भी उन्हें बी.एड की डिग्री मिल जाती है. राज्यपाल ने कहा कि अब ऐसा नहीं होगा. इस अव्यवस्था को जल्द ही समाप्त कर दिया जाएगा. बी.एड की प्रवेश परीक्षा में धांधली करने वालों पर रोक लगाने के लिए बिहार सरकार इसी साल अगस्त महीने से सेंट्रलाइज्ड एग्जाम सिस्टम यानी एकीकृत परीक्षा प्रणाली लागू करेगी. इसके तहत सरकार ‘नीट’ की तर्ज पर बी.एड की प्रवेश परीक्षा कराएगी. इससे बी.एड की फर्जी डिग्री बांटने वाली संस्थाओं और इस रैकेट से जुड़े लोगों का यह अवैध कारोबार समाप्त हो जाएगा. राज्यपाल ने कहा कि यह परीक्षा पूरे बिहार के बी.एड कॉलेजों के लिए होगी.

इंटर परीक्षा में टॉपर घोटाले से हुई थी किरकिरी
बिहार में 2016 में इंटरमीडिएट की परीक्षा में टॉपर घोटाले से राज्य की शिक्षा व्यवस्था की देशभर में किरकिरी हुई थी. दरअसल, इंटर आर्ट्स की टॉपर रूबी राय ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि उसने ‘प्रोडिकल साइंस’ की पढ़ाई कर इंटर की परीक्षा पास की है. रूबी ने कहा था कि इस विषय में ‘कूकिंग’ की पढ़ाई होती है. इस इंटरव्यू ने बिहार माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी बिहार बोर्ड की कलई खोल दी थी. इससे यह भी खुलासा हुआ था कि बिहार में कई स्कूल और कॉलेज फर्जी तरीके से विद्यार्थियों का एडमिशन कराकर उन्हें फर्जी तरीके से परीक्षा पास करा देते हैं. टॉपर घोटाले की बिहार सरकार ने जांच कराई और इसके दोषियों को कानून के शिकंजे में लिया गया. इसके एक साल बाद एक बार फिर इंटर आर्ट्स के टॉपर गणेश कुमार का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था. इसमें पता चला था कि गणेश कुमार ने 1992 में कॉमर्स विषय से इंटर की परीक्षा पास की थी. 2017 में उसने नाम बदलकर फिर से इंटर की परीक्षा दी थी. इसके बाद हुए बी.एड डिग्री घोटाले ने राज्य सरकार को इस संदर्भ में कड़े कदम उठाने को मजबूर कर दिया है.