Fodder Scam: चारा घोटाला मामले राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Yadav) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सर्वोच्च न्यायालय ने लालू यादव की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने मंगलवार (जुलाई, 14, 2026) को झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से मना कर दिया, जिसमें देवघर चारा घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सजा को सस्पेंड किया गया था.
‘Live Law’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच झारखंड राज्य की स्पेशल लीव पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में झारखंड हाईकोर्ट के 12 जुलाई, 2019 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें देवघर ट्रेजरी चारा घोटाला मामले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सजा को सस्पेंड किया गया था. बेंच ने कहा, ‘जानकार वकीलों को सुनने के बाद, हम आदेश में दखल देने के लिए तैयार नहीं हैं, इसलिए क्योंकि तब से सात साल बीत चुके हैं. अपील साल 2018 की है, इसलिए हाईकोर्ट से सुनवाई में तेजी लाने की रिक्वेस्ट करना ही सही होगा.’
बेंच ने कहा कि अपील पर 6 महीने के अंदर फैसला करना बेहतर होगा. राज्य की तरफ से पेश हुए, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने इस गलत आधार पर सजा सस्पेंड कर दी थी कि लालू यादव ने अपनी 50% सजा पूरी कर ली है. उन्होंने कहा कि सजा सस्पेंड करने की पिछली दो एप्लीकेशन खारिज कर दी गई थीं और तीसरी एप्लीकेशन को गलत आधार पर मंजूरी दी गई थी.
राजू ने दलील दी कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड का सेक्शन 427 लागू होगा, क्योंकि लालू यादव को अलग-अलग ट्रायल से जुड़े चारा घोटाले के कई मामलों में दोषी ठहराया गया था. उन्होंने दलील दी कि, जब तक कोर्ट कुछ और न कहे, बाद की सजाओं में दी गई सजाएं पिछली सजा खत्म होने के बाद ही शुरू होती हैं. उनके मुताबिक, हाईकोर्ट ने जेल में बिताई गई अवधि का हिसाब लगाते समय गलत तरीके से सजाओं को एक साथ माना.
मालूम हो कि CBI कोर्ट ने लालू प्रसाद को IPC और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के अलग-अलग प्रोविजन के तहत दोषी ठहराया था और साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी. यह लालू प्रसाद की हाई कोर्ट में अपनी सजा सस्पेंड करने की तीसरी अर्जी थी. उनकी पिछली अर्जी 23 फरवरी, 2018 और 10 जनवरी, 2019 को इस आधार पर खारिज कर दी गई थीं कि उन्होंने आधी सजा पूरी नहीं की है.
नई अर्जी में, लालू प्रसाद ने कहा कि उन्होंने तब से अपनी आधी से ज्यादा सजा पूरी कर ली है. उन्होंने पिछले ऑर्डर का भी हवाला दिया, जिसमें हाईकोर्ट ने इसी तरह के सह-दोषियों की सजा को उनकी अपनी-अपनी सजा की आधी अवधि पूरी करने के बाद सस्पेंड कर दिया था.
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