Bihar Assembly Election 2020: बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद दोनों गठबंधन में खेल शुरू हो गया है. महागठबंधन से नाराज चल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की पार्टी रालोसपा (RLSP) ने नेतृत्व के सवाल पर तेजस्वी यादव को गठबंधन का नेता मानने से इनकार करते हुए गठबंधन का साथ छोड़ दिया है और आज वो इसकी विधिवत घोषणा करने वाले हैं.Also Read - Bihar News: प्रेमिका के घरवालों ने प्रेमी की पीट-पीटकर कर दी हत्या, हफ्ते भर के भीतर दूसरी ऐसी घटना

महागठबंधन से नाता तोड़ने के बाद कुशवाहा दिल्ली गए थे जहां उन्होंने भाजपा नेता से मुलाकात की थी. मिली जानकारी के मुताबिक वहां भी उनकी बात नहीं बनी और एनडीए में भी उनकी इंट्री नहीं हो सकी. ऐसे में रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा आज दो बजे महागठबंधन से अलग होने का विधिवत ऐलान करेंगे और मायावती की पार्टी बसपा के साथ तीसरे मोर्चे की घोषणा करेंगे जो कुशवाहा के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा. Also Read - Bihar Assembly Session: बिहार विधानसभा में जोरदार हंगामा, सदन में RJD विधायक ने कहा 'बेईमान'

इस संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एक ट्वीट भी किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि , “आज दोपहर 2 बजे, होटल मौर्य, पटना में आयोजित प्रेस वार्ता के माध्यम से मीडिया एवं रालोसपा के समर्पित साथियों सहित बिहारवासियों को संबोधित करूंगा.” Also Read - Bihar News: कथावाचक बने बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे, मथुरा में कर रहे भगवद कथा का पाठ

बता दें कि RLSP अध्यक्ष कुशवाहा ने हाल ही में 24 सितंबर को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में संकेत दिए थे कि वो विधानसभा की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. इसके साथ ही नीतीश कुमार के लिए खुले तौर पर कहा था कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से मुकाबला करने की क्षमता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) में नहीं है. इससे जीतनराम मांझी ने भी महागठबंधन से दूरी बना ली थी और एनडीए का हिस्सा बनने का ऐलान किया था.

दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा चाहते थे कि महागठबंधन उन्हें नीतीश के मुकाबले सीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करे, लेकिन महागठबंधन में  राजद सीएम उम्मीदवार का चेहरा तो दूर कुशवाहा की पार्टी को 10 -12 से ज्यादा सीट देने को भी तैयार नहीं थी. कांग्रेस ने भी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी जिसके बाद कुशवाहा ने दिल्ली का रूख किया था.