Bihar Assembly Election 2020: बिहार विधानसभा चुनाव की घंटी बज चुकी है, चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार के लिए गाइडलाइन जारी करने की भी बात कही है. चुनाव के करीब आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों में नेताओं का दल-बदल भी शुरू हो चुका है. विभिन्न मुद्दों को लेकर आपसी रंजिश और दोस्ती के नए समीकरण देखने को मिल रहे हैं. मुख्य मुकाबला एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच है. वहीं तीसरे समीकरण की भी चर्चा जोरों पर है. Also Read - बिहार में पोस्टर वार: 'एक ऐसा परिवार जो बिहार पर भार' लालू 'सजायाफ्ता कैदी नंबर 3351'

बिहार में तीसरा मोर्चा हुआ सक्रिय Also Read - बिहार: विधायक जी ने दी धमकी-अगर हम हारे तो तुम्हारे गांव में अकाल पड़ेगा, Video पर बवाल

इस बीच बिहार मे एक तीसरा समूह भी सक्रिय हो रहा है, जो है तो छोटी पार्टी लेकिन इसमें बड़े-बड़े नेता जुड़े हुए हैं. कुछ दिनों पहले ही इस दल की चर्चा हुई थी और तभी से बिहार में तीसरा मोर्चा बनने की बात सामने आई थी. अभी फिलहाल तो इस दल की सक्रियता ज्यादा नहीं  दिख रही, लेकिन ये दल नेताओं के प्रभाव के कारण बड़े दलों को इस बार के चुनाव में परेशानी बढ़ा सकता है. Also Read - बिहार कैबिनेट के बड़े फैसले-नौकरियों की आई बहार, डबल डेकर फ्लाई ओवर भी जल्द

यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में बेहतर बिहार-बदलो बिहार  

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में बने इस दल ने कुछ महीने पहले अपनी आधिकारिक घोषणा की थी और बिहार में तीसरे मोर्चे का ऐलान किया था. उन्होंने पटना में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में यह घोषणा की थी और बताया था कि प्रदेश की बदहाल स्थिति को देखते हुए वे तीसरे मोर्चे का गठन कर रहे हैं.  यशवंत सिन्हा ने यह भी कहा कि खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं, यह भविष्य तय करेगा.

बक्सर में तीसरे मोर्चे की बैठक, तय होगी रणनीति

अब ये तीसरा मोर्चा बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहा है. आज बक्सर में इन मंत्रियों ने बदलो बिहार के बैनर तले अपनी रणनीति तय करनेवाला है. इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, पूर्व सांसद अरूण कुमार, पूर्व सांसद रेणु कुशवाहा, पूर्व सांसद नागमणि, पूर्व सांसद देवेंद्र यादव सहिर दर्जनों विधायक बक्सर पहुंचे हैं. यहां आयोजित बैठक के बाद अपनी आगे की रणनीति मीडिया के सामने बताएंगे.

बड़े राजनीतिक दलों की बढ़ सकती है परेशानी

बता दें कि इन बड़े मंत्रियों का फिलहाल ये छोटा इस बात पर जोर दे रहा है कि बेहतर बिहार के लिए इस बार मतदान करें. इस समूह की खासियत ये है कि ये सीधे जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं और बिना किसी तामझाम के. हालांकि बिहार में चुनाव को लेकर जहां बड़े राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं इस तीसरे मोर्चे का डर भी उन्हें सता रहा है.

इस छोटे दल के लिए बड़े दल के नेताओं का यह डर अवश्यंभावी है क्योंकि इस समूह के नेताओं का अपने क्षेत्र में वर्चस्व है और वो जनता को प्रभावित कर सकते हैं. भले ही इस छोटे दल के उम्मीदवार चुनाव में जीत हासिल ना कर सकें लेकिन बड़े दलों के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं.