Bihar Assembly Election 2020: देश में पहली बार कोरोना महामारी के बीच बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस बार चुनाव में बिहार की नीतीश सरकार इस बार चुनाव के लिए अनुमानित 625 करोड़ रुपये का खर्च करेगी जो कि 2015 में अंतिम राज्य के चुनावों में खर्च की गई राशि का दोगुना है. राज्य सरकार को बार के चुनाव में कुल राशि का पांचवां हिस्सा मतदाताओं और मतदान कर्मियों के लिए बूथों पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए खर्च करना होगा. Also Read - पप्पू यादव ने जारी किया शपथ पत्र, कहा-एक मौका तो हमें दीजिए, ऐसे बदल देंगे बिहार को

पिछले चुनाव की बात करें तो उस वक्त चुनाव पर लगभग 270 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और उसकी अपेक्षा इस वर्ष के चुनावों के खर्च में 131.48%  रुपये खर्च होंगे. इसका सबसे बड़ा कारण कोरोना महामारी है. इस बार  छह लाख मतदान कर्मियों के लिए पीपीई किट खरीदने के अलावा दस्ताने और मास्क जैसे सुरक्षा उपायों के कारण अधिक राशि खर्च होगी. Also Read - जब डीजीपी रहे गुप्तेश्वर पांडेय को महिला पुलिसकर्मियों ने कहा था-हटिए, नहीं तो टनका देंगे

वहीं, चुनाव आयोग (ECI) भी मतदाताओं की सुरक्षा के लिए विचार कर रहा है, जिसमें बूथ के बाहर गोला बनाना भी शामिल है, जहां मतदाताओं को वोट डालने से पहले सोशल डिस्टेंसिंग करते हुए दूर-दूर खड़े होने के लिए कहा जाएगा. वहीं इस बार बसों, ट्रकों, एसयूवी और अन्य वाहनों की आवश्यकता पिछले चुनावों की तुलना में बहुत अधिक होगी, जिसमें खर्च अधिक होगा. Also Read - बिहार विधानसभा चुनाव कब है? तारीख कब आएगी? मुख्य चुनाव आयुक्त ने बतायी ये बात

चुनाव से संबंधित अधिकारी ने बताया कि “इस बार मतगणना केंद्र बहुत बड़े होंगे ताकि मतगणना प्रक्रिया के दौरान पोलिंग एजेंट और मतदानकर्मी उचित सामाजिक दूरी बनाए रख सकें.”

सूत्रों के मुताबिक चुनाव के दौरान सुरक्षा मानदंडों को बनाए रखने के लिए प्रत्येक बूथ में 1000 या उससे कम मतदाताओं की संख्या को रखने के लिए 72,727 बूथों के अलावा 33,797 ऑक्सिलरी बूथों के निर्माण के साथ 45% तक बूथों की वृद्धि की गई है. बता दें कि बिहार में कुल 243 विधानसभा क्षेत्र हैं. इतनी तैयारियों में राज्य सरकार को काफी अन्य तरह के खर्च करने होंगे.