
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Bihar Assembly Elections 2025: मोकामा की राजनीति पिछले तीन दशकों से किसी न किसी ‘बाहुबली’ के प्रभाव में रही है. ये क्षेत्र 2005 से ‘छोटे सरकार’ यानी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के दिग्गज नेता अनंत सिंह का अभेद्य किला बना हुआ है. गंगा के दक्षिणी तट पर बसा मोकामा विधानसभा पटना से सिर्फ 85 किलोमीटर दूर है. जब भी बिहार विधानसभा चुनाव की बात आती है तो सभी की निगाहें पटना जिले की इस सीट पर भी टिकी रहती हैं.
अनंत सिंह ने लगातार पांच बार इस सीट पर जीत का परचम लहराया है. उनका राजनीतिक सफर किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है.अनंत सिंह ने 2015 में पार्टी से किनारा होने पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़कर भी जीत हासिल की. वह 2020 में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हुए और जेल में रहते हुए भी जीत दर्ज की.
मोकामा में 30 अक्टूबर को जन सुराज पार्टी से जुड़े दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई. दो समूहों के बीच हुई फायरिंग के दौरान दुलारचंद यादव की मौत हो गई. इस घटना के बाद मोकामा फिर से सुर्खियों में है.
2022 में एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अनंत सिंह को अपनी विधानसभा सदस्यता गंवानी पड़ी थी. लेकिन मोकामा की जनता ने तब भी उनका साथ नहीं छोड़ा. 2022 के उपचुनाव में, उनकी पत्नी नीलम देवी को राजद ने मैदान में उतारा जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सोनम देवी को बड़े अंतर से हराकर इस सीट को राष्ट्रीय जनता दल के पास बनाए रखा.अब 2025 के चुनावों में अनंत सिंह फिर से जदयू में लौट आए हैं और पार्टी ने उन पर एक बार फिर भरोसा जताया है.
इस बार महज कुछ दिनों बाद बिहार में विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होने हैं और मोकामा विधानसभा सीट पर पहले चरण (6 नवंबर) को मतदान होगा। यह हाई-प्रोफाइल सीट इस बार भी कांटे की टक्कर के लिए तैयार है. मोकामा सीट पर भूमिहार समुदाय का प्रभुत्व माना जाता है लेकिन यहां के चुनाव परिणाम हमेशा जटिल जातीय समीकरणों पर निर्भर करते हैं.