पटना। 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी सामने बिहार सबसे बड़ा पेंच बनकर उभर रहा है. यहां सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए के घटक दलों में सियासी संग्राम मचने के आसार हैं. एनडीटीवी.कॉम पर छपी एक की एक खबर के मुताबिक सीएम नीतीश कुमार के दबाव में बीजेपी ने सीट शेयरिंग का एक फॉर्मूला सुझाया भी है. लेकिन बताया जा रहा है कि जेडीयू की तरफ से इसे पूरी तरह नकार दिया गया है. Also Read - बिहार के मुख्यमंत्री को जान मारने की धमकी, 25 लाख रुपये का रखा इनाम

बीजेपी को 20 सीटें, जेडीयू को 12 Also Read - Covid-19: प्रशांत किशोर ने शेयर किया लॉकअप में बंद मजदूरों का वीडियो, मांगा नीतीश का इस्तीफा

बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक 20 सीटें पार्टी को मिलेंगी. बीजेपी और सहयोगियों के पास इस वक्त 31 सीटें हैं. फॉर्मूले के मुताबिक नीतीश कुमार के जनता दल यू को 12 सीटें, रामविलास पासवान को 6 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा को 2 सीटें देने का प्रस्ताव है. जेडीयू नेताओं का कहना है कि पार्टी को ऑफर की गई सीटें न तो उचित है और न ही सम्माननीय. Also Read - Covid-19 Fight: कोरोना से लड़ने के लिए केंद्र सरकार का एक और बड़ा कदम, गठित हुईं 11 टीमें

बिहार में सीट शेयरिंग पर बोले नीतीश कुमार, 3-4 हफ्ते में बीजेपी से ऑफर

उपेंद्र कुशवाहा पर सस्पेंस

एक नेता का कहना है कि बीजेपी को भी ये मंजूर नहीं है. उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच सीटों का उचित बंटवारा होना चाहिए. दोनों को 17-17 सीटें मिलनी चाहिए और पासवान को बची हुई 6 सीटें दी जाएं. उपेंद्र कुशवाहा को अब एनडीए में नहीं माना जाना चाहिए. क्योंकि वह गठबंधन से बाहर जाने का फैसला एक तरह से ले चुके हैं. बता दें कि कुशवाहा ने हाल ही में खीर वाला बयान दिया था. उन्होंने यादवों के दूध और कुशवाहों के चावल से स्वादिष्ट खीर बनाने की बात कही थी. इस तरह से उन्होंने चुनाव से पहले पाला बदलने का संकेत दिया था.

बिहार में बीजेपी ने जीती थी 22 सीटें 

हालांकि, बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव ने कहा कि अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है. जब होगा बता दिया जाएगा. 2014 में बीजेपी ने बिहार में 22 सीटें जीती थीं, एनडीए को कुल 31 सीटें मिली थीं. बीजेपी के साथ 17 साल पुराना गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश कुमार की जेडीयू को लोकसभा की सिर्फ दो सीटें मिलीं. 2015 में नीतीश ने लालू प्रसाद यादव से दोस्ती कर ली और विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल किया. लेकिन 20 महीने बाद ही लालू-कांग्रेस का साथ छोड़कर दोबारा बीजेपी के साथ आ गए.