नई दिल्ली. अगले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे की रार बढ़ती ही जा रही है. प्रदेश की 40 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर जदयू और भाजपा के बीच सीटों के बंटवारे पर मतैक्यता नहीं बन पा रही है. नौबत यहां तक आ पहुंची है कि जदयू के नेता संजय सिंह ने आज कह दिया कि भाजपा जल्द से जल्द सीटों का बंटवारा तय कर ले. अगर वह गठबंधन नहीं करना चाहती है तो अकेले ही सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. संजय सिंह का यह बयान, विपक्षी नेताओं के उन बयानों की पुष्टि करता हुआ दिखता है कि बिहार राजग में सब-कुछ ठीक नहीं है और सीएम नीतीश कुमार की पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से अलग हो जाएगी. बिहार राजग में यह तनातनी, आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों पार्टियों के लिए सही संकेत नहीं है. Also Read - यूपी: बीजेपी नेता की मौत, कार में मिली गोली लगी लाश, तमंचा और शराब की बोतल भी मिली

जदयू के दावे से शुरू हुआ विवाद
लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे का विवाद जदयू के 25 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे से शुरू हुआ है. वहीं, कल जदयू की तरफ से नया बयान आया. भाजपा सहित बिहार की चार सहयोगी पार्टियों में सीट बंटवारे के लिए जदयू 2015 के राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों को आधार बनाना चाहता है. जदयू ने विधानसभा चुनाव में भाजपा से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया था. जदयू नेताओं का दावा है कि 2015 का विधानसभा चुनाव राज्य में सबसे ताजा शक्ति परीक्षण था और आम चुनावों के लिए सीट बंटवारे में इसके नतीजों की अनदेखी नहीं की जा सकती. जदयू के नेताओं ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि भाजपा को यह सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए कि सीट बंटवारे पर फैसला जल्द हो ताकि चुनावों के वक्त कोई गंभीर मतभेद पैदा न हो. बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू को राज्य की 243 सीटों में से 71 सीटें हासिल हुई थीं. वहीं भाजपा को 53 और लोजपा-रालोसपा को दो-दो सीटें मिली थीं. जदयू उस वक्त राजद एवं कांग्रेस का सहयोगी था, लेकिन पिछले साल वह इन दोनों पार्टियों से नाता तोड़कर राजग में शामिल हो गया और भाजपा के साथ सरकार बना ली. Also Read - UP Panchayat Chunav: कुलदीप सेंगर की बेटी ने मां का टिकट कैंसिल होने पर भावुक वीडियो शेयर कर उठाए सवाल

भाजपा ने कहा- जदयू की मांग अवास्तविक
जदयू की इस मांग पर राजग के अन्य सहयोगियों का ‘बिदकना’ स्वाभाविक है. भाजपा और उसकी दो सहयोगी पार्टियों- राम विलास पासवान की अगुआई वाली लोजपा और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा- की ओर से जदयू की मांग पर सहमति के आसार न के बराबर हैं. वहीं, भाजपा के नेताओं ने भी जदयू की मांग को खारिज किया है. भाजपा के एक नेता ने जदयू की दलील को ‘अवास्तविक’ करार देते हुए कहा कि चुनावों से पहले विभिन्न पार्टियां ऐसी ‘चाल’ चलती हैं. उन्होंने दावा किया कि 2015 में लालू प्रसाद की अगुवाई वाले राजद से गठबंधन के कारण जदयू को फायदा हुआ था. नीतीश की पार्टी की असल हैसियत का अंदाजा 2014 के लोकसभा चुनाव से लगाया जा सकता है, जब वह अकेले दम पर लड़ी थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू को 40 में से महज दो सीटों पर जीत मिली थी. ज्यादातर सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. बता दें कि साल 2014 के आम चुनावों में भाजपा को बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 22 पर जीत मिली थी, जबकि इसकी सहयोगी लोजपा और रालोसपा को क्रमश: छह और तीन सीटें मिली थीं.

2014 के चुनाव ने बदले समीकरण
जदयू 2013 तक भाजपा का सहयोगी था. उस वक्त वह राज्य में निर्विवाद रूप से वरिष्ठ गठबंधन साझेदार था और लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में वह हमेशा ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ता था. लोकसभा चुनावों में जदयू 25 और भाजपा 15 सीटों पर चुनाव लड़ती थी. लेकिन 2014 में भाजपा की जोरदार जीत ने समीकरण बदल दिए हैं और राजग में अन्य पार्टियों के प्रवेश का मतलब है कि पुराने समीकरण अब प्रासंगिक नहीं रह गए. यही वजह है कि सीट बंटवारे को लेकर राजग के साझेदारों में अभी बातचीत शुरू नहीं हुई है, लेकिन जदयू ने मोलभाव शुरू कर दिया है. जदयू के नेताओं ने हाल में आयोजित योग दिवस समारोहों में हिस्सा नहीं लिया. पार्टी ने कहा कि वह इस साल के अंत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारेगी. जदयू ने अगले महीने दिल्ली में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है जिसमें कई मुद्दों पर पार्टी अपना रुख साफ करेगी.

कांग्रेस का वार, भाजपा बिहार में दोहराएगी कश्मीर
इधर, बिहार में राजग के भीतर सीट बंटवारे पर चल रही तकरार के बीच कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह जम्मू कश्मीर जैसी स्थिति बिहार में भी ला सकती है. कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि इसकी पृष्ठभूमि में बिहार में जद (यू) की अगुवाई वाली सरकार से भाजपा के समर्थन वापसी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. गोहिल ने गरीब उत्तरी राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा न देने के लिए मोदी सरकार की आलोचना की. उन्होंने वड़ोदरा में रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नीति आयोग के हाल की बैठक में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग का मुद्दा उठाया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले रविवार को नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा ‘अपमानित’ करने के बाद भी नीतीश कुमार ने भाजपा की अगुवाई में राजग में बने रहने का निर्णय लिया है.

(इनपुट – एजेंसी)